ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) आज दुनिया भर में महिलाओं के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है. हालिया शोध के अनुसार, साल 2023 में लगभग 23 लाख महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आईं और 7.64 लाख महिलाओं की मृत्यु हो गई. यह स्टडी 1990 से 2023 तक के 204 देशों के आंकड़ों पर आधारित है, जो भविष्य के लिए एक डरावनी तस्वीर पेश करता है.

अमीर बनाम गरीब देश: स्वास्थ्य का बड़ा अंतर

स्टडी से पता चलता है कि ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं को प्रभावित तो हर जगह करता है, लेकिन इसके परिणाम समान नहीं हैं. फ्रांस, जर्मनी और आयरलैंड जैसे अमीर देशों में प्रति 1,00,000 महिलाओं पर लगभग 100 नए मामले मिलते हैं. हालांकि, यहां मृत्यु दर में 1990 से अब तक 30% की कमी आई है. अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे देशों में नए मामले कम (13 प्रति 1,00,000) हैं, लेकिन 1990 के बाद से यहां मामलों में 147% की भारी वृद्धि हुई है. यहां मृत्यु दर लगभग दोगुनी होकर 24 (प्रति 1,00,000 महिला) हो गई है. नाइजीरिया के चिकित्सक डॉ. ओलायिंका इलेसानमी के अनुसार, गरीब देशों में रेडियोथेरेपी मशीनों, कीमोथेरेपी दवाओं और पैथोलॉजी लैब की कमी के कारण महिलाएं समय पर इलाज नहीं पा पा रही हैं.

जीवनशैली से जुड़े 6 बड़े जोखिम (Modifiable Risk Factors)

हैरान करने वाली बात यह है कि 2023 में ब्रेस्ट कैंसर के 28% मामले हमारी जीवनशैली से जुड़े थे. इन्हें सुधारकर कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है.यह कुल जोखिम का लगभग 11% हिस्सा है. सिगरेट और सेकंड हैंड स्मोक (8%). मधुमेह और चीनी का अधिक स्तर (6%). वजन का अधिक होना (4%). शराब का सेवन (2%). व्यायाम की कमी (2%). डॉ. मैरी एनजी (National University of Singapore) का कहना है कि अगर हम अपनी आदतों में सुधार करें, तो अगली पीढ़ी को इस बीमारी से बचाया जा सकता है.

समान इलाज की जरूरत और भविष्य की राह

रिसर्चर का मानना है कि सभी महिलाओं को जीवित रहने का समान अधिकार है. इसके लिए कैंसर के इलाज की लागत कम करना और हर देश में शुरुआती निदान (Early Diagnosis) की सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य है. विशेषज्ञों ने यह भी नोट किया कि इस अध्ययन में नस्लीय या आनुवंशिक डेटा की कमी है. भविष्य में अफ्रीकी, एशियाई और अन्य नस्लीय समूहों के विशिष्ट जेनेटिक संकेतों को समझकर और भी बेहतर इलाज रणनीतियां बनाई जा सकती हैं.

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हालिया शोध के अनुसार, साल 2023 में लगभग 23 लाख महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आईं और 7.64 लाख महिलाओं की मृत्यु हो गई.
Priya Gupta
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Priya Gupta brings over six years of dynamic journalism experience from leading Indian news agencies, including NDTV, News Nation, and Zee News. TV9 Bharatvarsh A seasoned reporter, she has covered key beats like politics, education, jobs, and international relations, delivering insightful analysis on national and global issues. Priya now drives coverage at health dailogues managing news updates in the health sector. She handles media outreach, develops press releases, spotlights healthcare professionals and institutions, and leads health awareness initiative