कैंसर आज भी दुनियाभर में मौत की सबसे बड़ी वजहों में से एक बना हुआ है। यह बीमारी न सिर्फ मरीज के शरीर को प्रभावित करती है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। समय के साथ विज्ञान और इलाज में कई तरक्की हुई है, लेकिन इसके बावजूद कैंसर का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में साल 2022 के आंकड़े इस गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं। इस क्षेत्र में करीब 19 लाख नए कैंसर मामलों का अनुमान लगाया गया, जबकि लगभग 13 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई। चिंता की बात यह है कि इनमें 56 हजार से अधिक मामले बच्चों से जुड़े थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वर्ष 2050 तक कैंसर के नए मामलों और इससे होने वाली मौतों की संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है।

वर्ल्ड कैंसर डे 2026 की थीम “यूनाइटेड बाय यूनिक” इस बात पर जोर देती है कि कैंसर एक वैश्विक समस्या है, लेकिन इसका असर हर देश, हर समुदाय और हर व्यक्ति पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है। इसलिए इसकी रोकथाम और इलाज के लिए एक जैसे समाधान कारगर नहीं हो सकते। स्थानीय जरूरतों को समझकर, मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।

इसी दिशा में विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों को 2024 से 2030 तक की कैंसर रोकथाम और प्रबंधन रणनीति के तहत सहयोग कर रहा है। इसका उद्देश्य देशों को मजबूत नेशनल कैंसर कंट्रोल प्लान बनाने में मदद करना, कैंसर रजिस्ट्रियों को सशक्त करना, समय पर जांच और बेहतर इलाज सुनिश्चित करना तथा पेलियेटिव केयर तक आसान पहुंच बनाना है।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर देशों को उनकी मौजूदा स्थिति का विश्लेषण और सुधार के सुझाव दिए जा रहे हैं, ताकि सही जगह निवेश किया जा सके। बच्चों के कैंसर के लिए विशेष नेटवर्क और क्षेत्रीय सहयोग मंच भी बनाए गए हैं, जो वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर स्थानीय स्तर पर बेहतर फैसले लेने में मदद कर रहे हैं।

कई देशों ने इस दिशा में उल्लेखनीय पहल की है। थाईलैंड ने सभी सार्वजनिक अस्पतालों में कैंसर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई है। भारत जिलास्तर पर डे-केयर कीमोथेरेपी केंद्रों का विस्तार कर रहा है। भूटान की राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री पूरे देश का डेटा इकट्ठा कर रोकथाम और इलाज की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर रही है। वहीं, नेपाल ने बच्चों के कैंसर का इलाज मुफ्त किया है और श्रीलंका ने इसके लिए अलग राष्ट्रीय नीति बनाई है।

हालांकि, चुनौतियां अब भी कम नहीं हैं। इस क्षेत्र में कैंसर से मृत्यु दर उच्च आय वाले देशों की तुलना में कहीं अधिक है। कई देशों में अभी भी स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस और इलाज की सुविधाएं समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कैंसर से लड़ने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दीर्घकालिक निवेश और सामूहिक प्रयास की अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है।

With Inputs From IANS

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कैंसर आज भी दुनियाभर में मौत की बड़ी वजह बना हुआ है, जो मरीजों के साथ-साथ उनके परिवारों के लिए भी गंभीर चुनौती है।
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.