COVID-19 का नया सब-वेरिएंट, जिसे BA.3.2 के नाम से जाना जाता है और जिसका निकनेम 'Cicada' वेरिएंट है, ने स्वास्थ्य को लेकर एक नई चिंता खड़ी कर दी है, खासकर बच्चों के लिए. Cicada वेरिएंट में 70-75 से ज़्यादा स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन हैं, जो स्वास्थ्य के लिए एक खतरा पैदा करते हैं, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है. एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यह वेरिएंट 23 देशों में फैल चुका है और US Centers for Disease Control and Prevention के मुताबिक, अमेरिका के 25 राज्यों के वेस्टवॉटर में भी पाया गया है, लेकिन इसके अनुमानित आंकड़े इससे भी ज़्यादा हो सकते हैं, क्योंकि टेस्टिंग कम कर दी गई है. इसे सबसे पहले 22 नवंबर, 2024 को साउथ अफ्रीका में लिए गए एक रेस्पिरेटरी सैंपल में पाया गया था. इसलिए, असल में इन्फेक्शन के मामलों की संख्या रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों से ज़्यादा हो सकती है.

खतरे से बचने के लिए क्या करें?

म्यूटेटेड प्रोटीन स्पाइक्स के बावजूद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), ICMR (भारत) के साथ मिलकर यह कहते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं है. लेकिन यह वेरिएंट बच्चों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, क्योंकि यह वेरिएंट पहले लगाई गई वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज़ से बच निकलने के लिए जाना जाता है. इसलिए, लोगों को अपडेट रहना चाहिए, बूस्टर डोज़ लेनी चाहिए, और सामान्य स्वास्थ्य सलाहों का पालन करना चाहिए, जैसे कि हाथ धोना, हाथ धोकर साफ़-सफ़ाई बनाए रखना, और सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनना.

बच्चों को इससे ज्यादा खतरा क्यों

जहां वयस्कों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह से विकसित होता है, जिसे उपलब्ध वैक्सीन समय पर लगवाकर और मज़बूत बनाया जा सकता है, वहीं लोगों को अपने बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है, क्योंकि यह नया सब-वेरिएंट बच्चों को वयस्कों की तुलना में पांच गुना ज़्यादा तेज़ी से संक्रमित करता है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह से विकसित नहीं होता. इसलिए, बच्चों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को सार्वजनिक जगहों पर बाहर निकलते समय खास सावधानी बरतने की जरूरत है.

मौजूदा रिसर्च, समीक्षाओं और स्टडी की बात करें, तो 'Plos One' जैसे स्रोत बताते हैं कि SARS-CoV-2 संक्रमण वयस्कों की तुलना में बच्चों और किशोरों को ज़्यादा प्रभावित करता है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है. यही बात नए सब-वेरिएंट पर भी लागू होती है, जिसके प्रोटीन स्पाइक्स में म्यूटेशन हुआ है. लगभग 70 से ज़्यादा म्यूटेशन और जो वैक्सीन से बनी मौजूदा एंटीबॉडीज़ से बच निकलने में कामयाब रहा है. बच्चों में इम्यून सिस्टम (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) के मामले में काफ़ी अंतर होता है, क्योंकि उन्हें बीमारी की गंभीरता समझाना मुश्किल होता है.

इसके अलावा, बाहरी वातावरण के संपर्क में आने की उनकी संभावना भी कहीं अधिक होती है, क्योंकि वे बाहर खेलते हैं, स्कूल जाते हैं और अक्सर इस बात पर कम ध्यान देते हैं कि वे किन सतहों को छू रहे हैं.बच्चों में एहतियाती बूस्टर डोज की कवरेज अभी भी कम है. प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) और MoHFW डैशबोर्ड के सबसे नए कुल डेटा के आधार पर, 12-14 साल के बच्चों के लिए ये आंकड़े दर्ज किए गए हैं.

पहली डोज: 33,011,876

दूसरी डोज (बूस्टर डोज़): 14,474,859

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Cicada वेरिएंट में 70-75 से ज़्यादा स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन हैं, जो स्वास्थ्य के लिए एक खतरा पैदा करते हैं, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है.
Priya Gupta
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Priya Gupta brings over six years of dynamic journalism experience from leading Indian news agencies, including NDTV, News Nation, and Zee News. TV9 Bharatvarsh A seasoned reporter, she has covered key beats like politics, education, jobs, and international relations, delivering insightful analysis on national and global issues. Priya now drives coverage at health dailogues managing news updates in the health sector. She handles media outreach, develops press releases, spotlights healthcare professionals and institutions, and leads health awareness initiative