चीनी वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस से जुड़ी एक अहम वैज्ञानिक खोज की है, जो भविष्य में महामारी की निगरानी और इलाज की रणनीतियों को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं ने इबोला वायरस में एक ऐसे महत्वपूर्ण म्यूटेशन की पहचान की है, जिसने एक बड़े प्रकोप के दौरान वायरस की संक्रमण क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा दिया था। यह अध्ययन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका सेल में प्रकाशित हुआ है।

यह शोध 2018 से 2020 के बीच कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में फैले इबोला वायरस रोग के प्रकोप पर आधारित है, जिसे अब तक का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप माना जाता है। इस दौरान 3,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे, जबकि 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज की गई थी। इतने बड़े और लंबे समय तक चले प्रकोप ने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या केवल कमजोर स्वास्थ्य ढांचा ही इसका कारण था, या फिर वायरस के भीतर हुए जैविक बदलावों ने भी इसकी भूमिका निभाई।

सन यात-सेन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कियान जुन के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस के विकास और उसके जीनोमिक बदलावों का गहन विश्लेषण किया। प्रोफेसर जुन के अनुसार, किसी भी बड़े संक्रामक रोग प्रकोप के दौरान वायरस की रियल-टाइम जीनोमिक निगरानी बेहद जरूरी होती है। इससे न केवल संक्रमण के बढ़ते खतरे का समय रहते पता चल सकता है, बल्कि यह भी आंका जा सकता है कि मौजूदा दवाएं और वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं।

शोध के तहत वैज्ञानिकों ने 2022 में इबोला वायरस के 480 पूर्ण जीनोम का अध्ययन किया। इस विश्लेषण में यह सामने आया कि डीआरसी प्रकोप के शुरुआती चरण में वायरल ग्लाइकोप्रोटीन में एक खास म्यूटेशन विकसित हुआ, जिसे जीपी-V75A नाम दिया गया। यह नया वैरिएंट तेजी से मूल वायरस स्ट्रेन की जगह लेने लगा और इसके फैलने की गति इबोला मामलों में आई तेज वृद्धि से मेल खाती थी।

प्रयोगशाला परीक्षणों में यह भी साबित हुआ कि जीपी-V75A म्यूटेशन ने वायरस की विभिन्न कोशिकाओं और चूहों में संक्रमण करने की क्षमता को काफी बढ़ा दिया था। इतना ही नहीं, इस म्यूटेशन के कारण कुछ मौजूदा एंटीवायरल एंटीबॉडी और स्मॉल-मॉलिक्यूल आधारित दवाओं की प्रभावशीलता भी कम होती पाई गई, जिससे दवा प्रतिरोध का खतरा बढ़ सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ये निष्कर्ष इस बात पर जोर देते हैं कि भविष्य में किसी भी संक्रामक रोग प्रकोप के दौरान वायरस के जीनोम की लगातार निगरानी बेहद जरूरी है। इससे न केवल संभावित खतरनाक म्यूटेशन को समय रहते पहचाना जा सकेगा, बल्कि अधिक प्रभावी और व्यापक उपचार रणनीतियां विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

With Inputs From IANS

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चीनी वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस में एक ऐसे म्यूटेशन की पहचान की है, जिससे बड़े प्रकोप के दौरान इसकी संक्रमण क्षमता बढ़ गई थी।
Kanchan Chaurasiya
Kanchan Chaurasiya

Kanchan Chaurasiya joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Marketing Coordinator. She holds a Bachelor's degree in Arts from Delhi University and has completed certifications in digital marketing. With a strong interest in health news, content creation, hospital updates, and emerging trends, Kanchan manages social media, news coverage, and public relations activities. She coordinates media outreach, creates press releases, promotes healthcare professionals and institutions, and supports health awareness campaigns to ensure accurate, engaging, and timely communication for the medical community and the public.