Dengue Vaccine India: भारत को जल्द मिलेगी पहली डेंगू वैक्सीन! जानें टाकेडा की इस 'संजीवनी' के फायदे और प्रभाव

भारत में डेंगू का प्रकोप हर साल हजारों लोगों को अस्पताल पहुंचाता है.अब तक इसका कोई सटीक टीका उपलब्ध नहीं था, लेकिन अब QDenga (टाकेडा की वैक्सीन) इस कमी को पूरा करने के लिए तैयार है. एक्सपर्ट की समिति (SEC) ने इसके क्लिनिकल डेटा की समीक्षा के बाद इसे सुरक्षित और प्रभावी माना है.
वैक्सीन की खासियत और प्रभावशीलता
टाकेडा की यह 'टेट्रावैलेंट' (Tetravalent) वैक्सीन डेंगू के चारों सिरोटाइप (DENV-1 से DENV-4) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है. यह वैक्सीन दुनिया के 41 देशों (जैसे यूके, ईयू और दक्षिण पूर्व एशिया) में पहले ही स्वीकृत है. रिसर्च के अनुसार, यह वैक्सीन उन लोगों में 64% प्रभावी है जो पहले डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, और 'डेंगू-नेव' (जिन्हें कभी डेंगू नहीं हुआ) लोगों में इसकी प्रभावशीलता 54% पाई गई है.
किसे और कैसे लगेगी यह वैक्सीन?
भारत में इस वैक्सीन को 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए पेश किए जाने की योजना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इसकी 2 डोज दी जाएंगी, जिनके बीच 3 महीने का अंतराल होगा. इस वैक्सीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे लगाने से पहले 'प्री-वैक्सीन स्क्रीनिंग' (यह जांचना कि पहले डेंगू हुआ है या नहीं) की जरूरी नहीं होती, जो भारत जैसे बड़े देश के लिए बहुत सुविधाजनक है.
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह टीका?
एडीज इजिप्टी मच्छरों द्वारा फैलता है. भारत दुनिया के उन टॉप 30 देशों में शामिल है जहां डेंगू का बोझ सबसे अधिक है. पिछले वर्ष भारत में 1.1 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें बच्चों को गंभीर बीमारी का खतरा सबसे अधिक रहा. एक बार एक स्ट्रेन से डेंगू होने के बाद, दूसरे स्ट्रेन से संक्रमण होने पर 'डेंगू हेमोरेजिक फीवर' (प्लेटलेट्स गिरना और ब्लीडिंग) जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है.
स्वदेशी वैक्सीन की तैयारी
टाकेडा के अलावा, भारत अपनी स्वदेशी वैक्सीन 'DengiAll'पर भी काम कर रहा है. इसे Panacea Biotec और ICMR मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसका फेज-III ट्रायल जारी है और इसके 2027 तक आने की उम्मीद है.
input IANS


