नई दिल्ली: वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही मौसम में स्पष्ट बदलाव देखने को मिलता है। दिन में तेज धूप और सुबह-शाम की हल्की ठंड शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डालती है। यह बदलता मौसम अगर सही ढंग से संभाला न जाए, तो सर्दी-खांसी, बुखार, अपच और नींद से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, हर ऋतु में शरीर की जरूरतें बदलती हैं, इसलिए आहार और जीवनशैली को मौसम के अनुरूप ढालना बेहद जरूरी होता है।

वसंत ऋतु में क्यों बढ़ता है कफ दोष?

आयुर्वेद में वसंत ऋतु को कफ दोष के प्रकोप का समय माना गया है। सर्दियों में शरीर में जमा हुआ कफ वसंत आते ही पिघलने लगता है, जिससे भारीपन, आलस्य, अपच और रात में नींद न आने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसी कारण इस मौसम में संक्रमण भी तेजी से फैलता है। लोग हल्की गर्मी महसूस होते ही ठंडी चीजों का सेवन शुरू कर देते हैं, जो कफ को और बढ़ाकर सर्दी-जुकाम और बुखार का कारण बनता है।

वसंत ऋतु में आहार परिवर्तन क्यों जरूरी है?

वसंत को आयुर्वेद में ऊर्जा का काल माना जाता है, लेकिन गलत खान-पान इस ऊर्जा को कमजोरी में बदल सकता है। इस ऋतु में हल्का, सुपाच्य और कफनाशक भोजन लेने की सलाह दी जाती है, जिससे शरीर संतुलन में रहे और रोगों से बचाव हो सके।

मूंग दाल की खिचड़ी: वसंत का आदर्श भोजन

वसंत ऋतु में मूंग दाल की खिचड़ी को सबसे उपयुक्त आहार माना जाता है। यह पेट पर बोझ नहीं डालती और पाचन को दुरुस्त रखती है। यदि इसमें एक चुटकी सोंठ पाउडर मिला दिया जाए, तो यह औषधीय गुणों से भरपूर हो जाती है। यह हल्की ठंड से बचाती है और रात की नींद को भी बेहतर बनाती है।

हल्की और फाइबर-युक्त सब्जियों का सेवन

इस मौसम में लौकी, तोरई और परवल जैसी सब्जियां आसानी से उपलब्ध होती हैं। इन्हें हल्का भूनकर या स्टीम करके खाना चाहिए। ये सब्जियां फाइबर से भरपूर होती हैं, जिससे कब्ज और गैस की समस्या दूर रहती है। साथ ही इनमें मौजूद विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।

बाजरा और अन्य लाभकारी खाद्य पदार्थ

अक्सर लोग बाजरे को केवल सर्दियों का अनाज मानते हैं, जबकि वसंत ऋतु में भी इसका सेवन बेहद फायदेमंद होता है। बाजरा तासीर में गर्म होता है और प्रोटीन व आयरन से भरपूर होता है। यह शरीर में फुर्ती लाता है और संक्रमण से बचाव करता है। इसके अलावा हल्का दूध, पपीता, अदरक, शहद मिला गुनगुना पानी और जौ का सूप भी वसंत ऋतु में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

निष्कर्ष

वसंत ऋतु में आहार में सही बदलाव करके न केवल नींद की समस्याओं से राहत पाई जा सकती है, बल्कि सर्दी-खांसी और अन्य मौसमी बीमारियों से भी बचाव संभव है। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार हल्का, सुपाच्य और कफनाशक भोजन अपनाकर इस मौसम को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाया जा सकता है। (With inputs from IANS)

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वसंत में सही आहार बदलाव से बेहतर नींद और खांसी-जुकाम से राहत मिलती है
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.