कैलोरी बर्न से मसल्स गेन तक, जानें फिट रहने के लिए क्यों जरूरी है कंपाउंड मूवमेंट्स

शरीर को स्वस्थ और दिमाग को सक्रिय रखने में व्यायाम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है. आज के समय में अधिकतर लोग योग या सामान्य जिम वर्कआउट तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन फिटनेस विशेषज्ञों के बीच इन दिनों “कंपाउंड मूवमेंट्स” तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इसे पूरे शरीर की फिटनेस के लिए बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है. सरल शब्दों में समझें तो कंपाउंड मूवमेंट्स ऐसे व्यायाम होते हैं, जिनमें एक ही समय पर शरीर की कई मांसपेशियां और जोड़ काम करते हैं.
उदाहरण के लिए, “स्क्वैट्स” और “डेडलिफ्ट” जैसे मूवमेंट सिर्फ पैरों को ही नहीं, बल्कि पीठ और शरीर के मध्य हिस्से यानी कोर मांसपेशियों को भी मजबूत बनाते हैं. इसी तरह बेंच प्रेस, पुल-अप, ओवरहेड प्रेस और लंज जैसे व्यायाम कई मसल ग्रुप को मजबूत बनाते हैं. इस तरह के व्यायाम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे मांसपेशियां तेजी से मजबूत होती हैं और शरीर की ताकत भी बढ़ती है. साथ ही, जब शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं तो ज्यादा कैलोरी खर्च होती है. इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है.
अभ्यासों में शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, व्यायाम का असर हमारे शरीर की कई प्रणालियों पर पड़ता है. इसमें हृदय, सांस लेने की प्रणाली, मांसपेशियां और हड्डियां, तथा शरीर की रोगों से लड़ने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली शामिल हैं. कंपाउंड एक्सरसाइज इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बना देती हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन अभ्यासों में शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं. इससे शरीर एक समन्वित इकाई की तरह बेहतर तरीके से कार्य करता है.
इसके विपरीत, आइसोलेशन एक्सरसाइज केवल एक मसल और एक जोड़ पर फोकस करती हैं। साइंस कंपाउंड मूवमेंट्स को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के लिए सर्वश्रेष्ठ मानता है. स्टडी से पता चलता है कि ये कंपाउंड मूवमेंट्स के दौरान कई बार अधिक वजन उठाना पड़ता है, जिससे मांसपेशियों की ताकत तेजी से बढ़ती है.
कंपाउंड एक्सरसाइज ज्यादा कैलोरी बर्न करती हैं क्योंकि अधिक मसल्स सक्रिय होती हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन नियंत्रण आसान होता है. ये हृदय के लिए फायदेमंद है। एक महत्वपूर्ण लाभ हार्मोनल रिस्पॉन्स है. भारी कंपाउंड लिफ्ट्स जैसे स्क्वाट और डेडलिफ्ट टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन के स्तर को अस्थायी रूप से बढ़ाते हैं, जो मसल ग्रोथ में मदद करते हैं.
कंपाउंड एक्सरसाइज से कार्डियो फिटनेस, बेंच प्रेस और स्क्वाट स्ट्रेंथ में ज्यादा सुधार होता है. कंपाउंड मूवमेंट्स इंटरमस्कुलर कोऑर्डिनेशन सुधारते हैं, जोड़ों की स्थिरता बढ़ाते हैं और रियल-लाइफ एक्टिविटीज जैसे उठाना, धक्का देना, खींचना के लिए शरीर तैयार करते हैं.
शुरुआती लोगों के लिए बॉडीवेट स्क्वाट, पुश-अप, लंज और असिस्टेड पुल-अप जैसे कंपाउंड व्यायाम आदर्श हैं. एक्सपर्ट के अनुसार सही फॉर्म से शुरू करें, धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं और इन्हें अपनी रूटीन में शामिल करें, तो शरीर फिट और मजबूत बनेगा.
Input IANS


