वक्रासन से भस्त्रिका तक, कब्ज से छुटकारा दिलाएंगे ये 9 योगासन, तनाव से भी मिलेगी राहत

पेट साफ रहना ही सेहत की सबसे बड़ी कुंजी है। जब पेट साफ होता है तो पूरा शरीर हल्का, ऊर्जावान और मन शांत रहता है. कब्ज सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन और कई अन्य बीमारियों को जन्म दे सकता है। योग एक्सपर्ट्स के अनुसार, नियमित योगाभ्यास से पाचन तंत्र मजबूत होता है और कब्ज से स्थायी छुटकारा मिलता है. एक्सपर्ट ऐसे 9 प्रभावी योगासन और क्रियाएं को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं.
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार, 9 ऐसे प्रभावी योगासन और क्रियाओं में अग्निसार, कपालभाति, सूर्य नमस्कार, पादहस्तासन, मंडूकासन, पश्चिमोत्तानासन, वक्रासन, पवनमुक्तासन और भस्त्रिका शामिल हैं. ये आसान अभ्यास घर पर खाली पेट किए जा सकते हैं, जो पेट की मालिश करते हैं, पाचन अग्नि तेज करते हैं और गैस-ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करते हैं. रोजाना इनका अभ्यास करने से न सिर्फ कब्ज दूर होता है, बल्कि सेहत और मानसिक शांति भी बनी रहती है. कब्ज एक आम समस्या है जो पाचन तंत्र की कमजोरी, अनियमित खानपान और तनाव से होती है। योग के नियमित अभ्यास से इससे राहत मिलती है.
अग्निसार: यह एक क्रिया है जिसमें सांस बाहर छोड़कर पेट को अंदर-बाहर तेजी से हिलाया जाता है. इससे पेट के अंगों की गहरी मालिश होती है. पाचन अग्नि तेज होती है और पुराने कब्ज में बहुत राहत मिलती है. नियमित अभ्यास से पेट की चर्बी कम होती है और भूख संतुलित रहती है.
कपालभाति: यह तेज सांस छोड़ने वाली प्राणायाम क्रिया है जिसमें पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं. कपालभाति पाचन तंत्र को उत्तेजित करती है, आंतों की गति बढ़ाती है और गैस कब्ज दूर करती है। रोज 3-5 मिनट करने से पेट साफ रहता है और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है.
सूर्य नमस्कार: 12 आसनों की यह पूरी शृंखला पूरे शरीर को लाभ देती है. पेट पर खास फोकस से पाचन सुधरता है, आंतों की मालिश होती है और कब्ज में आराम मिलता है। रोज 5-10 राउंड करने से शरीर फिट रहता है और पेट हल्का महसूस होता है.
पादहस्तासन: इसमें खड़े होकर आगे झुककर हाथ पैरों तक ले जाते हैं. यह आसन पेट पर दबाव डालकर आंतों को उत्तेजित करता है, गैस निकालता है और कब्ज दूर करता है. रीढ़ की लचक बढ़ती है और पाचन प्रक्रिया तेज होती है.
मंडूकासन: यह बैठकर घुटनों को मोड़कर पेट पर दबाव डालने वाला आसन है. यह पेट के अंगों की मालिश करता है, पाचन अग्नि बढ़ाता है और कब्ज, एसिडिटी में राहत देता है. नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं.
पश्चिमोत्तानासन: यह भी बैठकर आगे झुककर पैरों को छूने वाला आसन है. पीठ और पेट की मांसपेशियों को खींचता है, आंतों पर दबाव डालकर कब्ज दूर करता है। पाचन तंत्र सुचारू होता है और कमर दर्द में भी फायदा मिलता है.
वक्रासन:- यह आसन रीढ़ और पेट को ट्विस्ट करता है, आंतों की मालिश से गैस और कब्ज दूर होता है। पाचन बेहतर होता है और शरीर में लचीलापन आता है.
पवनमुक्तासन: इस आसन में पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती से लगाया जाता है. इससे पेट में फंसी गैस निकालती है, पाचन सुधारता है और कब्ज में तुरंत राहत देता है। रोज करने से पेट हल्का और आरामदायक रहता है.
भस्त्रिका: यह तेज सांस अंदर-बाहर करने वाला प्राणायाम है। इसके अभ्यास से पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, पाचन अग्नि तेज होती है और कब्ज-गैस दूर होती है। साथ ही यह शरीर की ऊर्जा बढ़ाता है और पेट संबंधी समस्याओं में बहुत प्रभावी है.


