नई दिल्ली: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई शारीरिक बदलाव स्वाभाविक रूप से देखने को मिलते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है मांसपेशियों की ताकत और घनत्व में धीरे-धीरे कमी आना। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे हर व्यक्ति को गुजरना पड़ता है।

सामान्यतः हमारी मांसपेशियां और ताकत 20 के दशक में अपने चरम पर होती हैं, लेकिन 30 की उम्र पार करते-करते इसमें हल्की गिरावट शुरू हो जाती है। 40 के दशक के बाद यह कमी तेज हो जाती है, जबकि 50 की उम्र के बाद मांसपेशियों और शक्ति में गिरावट अधिक स्पष्ट रूप से महसूस होती है।

वास्तव में मानव मांसपेशियां सूक्ष्म रेशों से बनी होती हैं जिन्हें मसल फाइबर कहा जाता है। प्रत्येक मसल फाइबर में दो मुख्य प्रोटीन संरचनाएं होती हैं—एक्टिन और मायोसिन। जब हम किसी शारीरिक कार्य जैसे चलना, उठना या वजन उठाना करते हैं, तो ये प्रोटीन एक-दूसरे पर फिसलते हैं और मांसपेशियां सिकुड़ती हैं। इसी सिकुड़न के कारण शरीर में बल उत्पन्न होता है और हम गतिविधियों को अंजाम दे पाते हैं।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में सूक्ष्म टूट-फूट और विघटन की प्रक्रिया होती है। जब यह मांसपेशियों और ताकत में अत्यधिक कमी का रूप ले लेती है, तो इसे सार्कोपेनिया कहा जाता है। हालांकि इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन उचित पोषण, नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली से इस गिरावट की गति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, प्रोटीन की कमी, शारीरिक गतिविधियों में कमी और नस-मांसपेशियों के बीच समन्वय की कमी भी मांसपेशियों की कमजोरी में योगदान देती हैं।

इसी संदर्भ में एंटी-एजिंग एक्सरसाइज का महत्व बढ़ जाता है। इसका उद्देश्य शरीर को पुनः जवान बनाना नहीं, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों और ताकत की तेज गिरावट को कम करना है। नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों में सूक्ष्म स्तर पर माइक्रो टियर होता है, जिसे शरीर मरम्मत प्रक्रिया के दौरान नई प्रोटीन संरचनाओं के निर्माण से मजबूत बनाता है। इसे मसल हाइपरट्रॉफी कहा जाता है, जिससे मांसपेशियां घनी और ताकतवर बनती हैं।

विशेषकर स्क्वाट्स पैरों की मुख्य मांसपेशियों जैसे क्वाड्रिसेप्स, ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग्स पर काम करती हैं, जो रोजमर्रा के काम जैसे चलना, उठना और सीढ़ियां चढ़ने में मदद करती हैं। क्रंचेस कोर मसल्स को मजबूत बनाते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी स्थिर रहती है और कमर दर्द में राहत मिलती है।

लंजेस से पैरों, पेट और पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय किया जा सकता है और जोडों की मजबूती बनी रहती है। पुश-अप्स से कंधों, छाती और भुजाओं की ताकत बढ़ती है। ग्लूट ब्रिज या ब्रिजिंग से पीठ और कूल्हों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे शरीर की स्थिरता और कार्यक्षमता बढ़ती है।

अंततः, उम्र बढ़ने के बावजूद सही व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर मांसपेशियों और ताकत की गिरावट को धीमा किया जा सकता है। इस तरह, व्यक्ति लंबे समय तक मजबूत, सक्रिय और आत्मनिर्भर बना रह सकता है। (With inputs from IANS)

IANSAgingMuscle LossMuscle Fibers

Topic:

एंटी-एजिंग एक्सरसाइज उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और शरीर को फिट रखने में मदद करती हैं
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.