हर मौसम में कैसे रखें सेहत का ध्यान? आयुर्वेद से जानिए ऋतुचर्या के नियम

नई दिल्ली: आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवन जीने का सबसे आसान और प्राकृतिक तरीका है मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और आहार में बदलाव करना। इसे ऋतुचर्या कहा जाता है। भारतीय कैलेंडर को सूर्य की चाल के आधार पर छह ऋतुओं में बांटा गया है, और हर ऋतु का शरीर पर अलग प्रभाव पड़ता है। अगर हम मौसम के अनुरूप अपनी आदतों और खानपान में संतुलन बनाए रखें, तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है और शरीर एवं मन को स्वस्थ रखा जा सकता है।
सर्दियों की ऋतुएँ—हेमंत (मध्य नवंबर से मध्य जनवरी) और शिशिर (मध्य जनवरी से मध्य मार्च)—पाचन शक्ति को मजबूत करती हैं। इस समय पौष्टिक और थोड़ा भारी भोजन करना लाभकारी होता है। घी, दूध, गुड़, तिल, बाजरा, गेहूं और गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थ शरीर को ऊर्जा और ताकत देते हैं। साथ ही, इस मौसम में शरीर की तेल मालिश करना, गुनगुने पानी से स्नान करना और नियमित व्यायाम करना बेहद फायदेमंद होता है। हालांकि, ठंडी, सूखी और हल्की चीजें खाने से बचना चाहिए।
वसंत ऋतु (मध्य मार्च से मध्य मई) में शरीर में जमा कफ बढ़ता है, जिससे सर्दी, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इस समय हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। जौ, पुराना चावल, मूंग की दाल, शहद और हल्का गर्म पानी शरीर के लिए अच्छा रहता है। तला-भुना, भारी और ज्यादा मीठा भोजन कम करें। साथ ही रोज थोड़ा व्यायाम, सूखी मालिश और गुनगुने पानी से स्नान लाभकारी होता है।
ग्रीष्म ऋतु (मध्य मई से मध्य जुलाई) में शरीर की ऊर्जा कम होती है और पानी की कमी जल्दी महसूस होती है। इसलिए अधिक तरल पदार्थ जैसे छाछ, नारियल पानी, फलों का रस और साधारण पानी पीना चाहिए। हल्का, मीठा और ठंडक देने वाला भोजन लें। मसालेदार और तला-भुना खाना कम करें और धूप से बचाव करें। ढीले-ढाले कपड़े पहनना बेहतर होता है।
वर्षा ऋतु (मध्य जुलाई से मध्य सितंबर) में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस समय भारी, तला-भुना या बासी भोजन से बचना चाहिए। उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना लाभकारी है। खट्टा और नमकीन स्वाद थोड़ी मात्रा में लिया जा सकता है, लेकिन संयम जरूरी है। बारिश में भीगने से बचें और साफ-सफाई का ध्यान रखें।
शरद ऋतु (मध्य सितंबर से मध्य नवंबर) में पित्त बढ़ता है, जिससे त्वचा और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इस समय मीठा, कड़वा और ठंडक देने वाला भोजन करना अच्छा रहता है। तेल-मसाले और तेज धूप से बचाव करना चाहिए।
ऋतुचर्या के नियम अपनाकर हर मौसम में अपने शरीर और मन को संतुलित रखना संभव है। सही आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी और मौसम के अनुसार दिनचर्या बनाए रखने से रोगों से बचाव होता है और स्वास्थ्य बेहतर रहता है। (With inputs from IANS)


