पतंग की डोर से होने वाली चोटें – उत्सव की मस्ती से जानलेवा खतरा - डॉ देवेंद्र सिंह

पतंगबाज़ी को लंबे समय से एक आनंददायक परंपरा माना गया है, जिसे साहित्य और लोककथाओं में रोमांटिक रूप से प्रस्तुत किया गया है। रस्किन बॉन्ड की प्रसिद्ध कहानी "दी काइटमेकर" में इसे राजाओं का खेल बताया गया है, जहाँ लोग दोस्ताना मुकाबले करते हैं और हारने वाली पतंग आसमान में दूर बह जाती है।
लेकिन आज की हकीकत कहीं अधिक चिंताजनक है। जो कभी एक निर्दोष मनोरंजन था, वह अब खतरनाक गतिविधि बन गया है, क्योंकि काँच और धातु से, कोट की गयी पतंग की डोर, जिसे हम आम भाषा में मांझा कहते हैं, इंसानों और पक्षियों को गंभीर चोटें पहुँचा रही है। यही नहीं, पतंग के मांझे से होने वाली चोट कई मासूम ज़िंदगियाँ भी छीन रही है।
मांझा से होने वाले खतरे केवल सैद्धांतिक नहीं हैं। एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें 45 वर्षीय महिला दोपहिया वाहन चला रही थी और उसकी गर्दन पर पतंग की डोर लगने से गहरा घाव हो गया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण वह शॉक में चली गई और केवल सर्जरी होने से उसकी जान बच सकी।
पिछले 15 वर्षों में इस तरह की कई जानलेवा घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जो बताती हैं कि पतंग की डोर कितनी घातक हो सकती है। बार बार त्रासदियों के बावजूद, प्रशासन ने गैरजिम्मेदार पतंगबाज़ी पर रोक लगाने में पर्याप्त तत्परता नहीं दिखाई है। हर साल चोटें और मौतें दर्ज होती हैं, लेकिन पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता।
2016 में दिल्ली में दो बच्चों की मौत के बाद जनता के आक्रोश ने राजधानी सरकार को काँच या धातु से लेपित पतंग की डोर के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर किया। 2017 में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने पूरे देश में “चीनी मांझा” (काँच लेपित नायलॉन धागा) पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया। लेकिन लागू करने में ढिलाई के कारण कई लोग अब भी बच निकलते हैं।
पतंगबाज़ी के मुकाबले खुद जोखिम दिखाते हैं। जब एक डोर कट जाती है, तो पतंग दूर बह जाती है और उसकी ढीली डोर खतरनाक तरीके से लटकती रहती है। यह डोर राह चलते लोगों या दोपहिया सवारों की गर्दन में फँस सकती है, जिससे गंभीर चोटें या मौत तक हो सकती है।
कुछ चोटें मामूली होती हैं और दर्ज नहीं होतीं, लेकिन कुल मिलाकर नुकसान बड़ा है। बच्चे और युवा टूटी पतंगों के पीछे भागते हुए ट्रैफिक में दौड़ते हैं, दीवारें चढ़ते हैं या छतों पर दौड़ते हैं, जिससे गिरने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। पक्षी भी मांझा के शिकार बनते हैं। हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं, जहाँ टूटी डोर पेड़ों या बिजली की तारों में फँसकर पक्षियों को घायल कर देती है। PETA जैसी संस्थाओं को हर साल हजारों शिकायतें मिलती हैं।
मांझा बिजली के लिए भी गंभीर खतरा है। धातु लेपित डोर बिजली की तारों से टकराकर आग और बिजली कटौती का कारण बन सकती है। कई मामलों में लोग बिजली की तारों में फँसी पतंग की डोर से करंट लगने पर मौत का शिकार हुए हैं।
पतंगबाज़ी से होने वाली चोटें: जानिए क्यों है यह जानलेवा
पतंग उड़ाना देखने में निर्दोष लगता है, लेकिन मांझा गंभीर चोट पहुँचा सकता है।
1. सीधी चोटें (प्राथमिक प्रभाव)
डोर गर्दन में लिपटकर कट या गहरे घाव कर सकती है, यहाँ तक कि जानलेवा भी हो सकती है। हाथ और उंगलियाँ भी कटने के खतरे में रहती हैं।
2. अप्रत्यक्ष चोटें (द्वितीयक प्रभाव)
डोर पैरों में उलझकर गिरा सकती है, जिससे हड्डी टूट सकती है। दोपहिया वाहन पर बैठे लोग संतुलन खोकर सिर या छाती में गंभीर चोट पा सकते हैं।
3. वैस्कुलर ट्रॉमा
जब डोर गर्दन या अंगों की रक्त वाहिकाओं को काट देती है, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
सुरक्षित पतंगबाज़ी के लिए सुझाव
1. सही जगह चुनें
खुले मैदान या पार्क में पतंग उड़ाएँ। भीड़भाड़ वाली गलियों, व्यस्त सड़कों, पेड़ों और बिजली की तारों से दूर रहें।
2. मौसम पर ध्यान दें
तेज़ या अनिश्चित हवाओं में पतंग न उड़ाएँ।
3. सावधानी से संभालें
हाथों को सुरक्षित रखने के लिए दस्ताने या फिंगर कैप पहनें। मज़बूत रील का इस्तेमाल करें।
4. डोर सुरक्षित रखें
उपयोग न होने पर डोर बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।
5. खतरनाक डोर से बचें
काँच या धातु लेपित डोर का इस्तेमाल न करें। कपास या पर्यावरण अनुकूल विकल्प चुनें।
6. बिजली से दूर रहें
बिजली की तारों में फँसी पतंग कभी न निकालें।
7. अत्यधिक खींचाव से बचें
डोर को ज़्यादा खींचने से वह अचानक टूट सकती है और चोट पहुँचा सकती है।
जैसे जैसे मकर संक्रांति और बैसाखी जैसे त्योहार नज़दीक आते हैं, उम्मीद है कि पतंगबाज़ी एक आनंददायक परंपरा बनी रहे, न कि जानलेवा खतरा। आसमान में रंगीन पतंगों का नृत्य देखने का सुख इंसानों की जान, पक्षियों की सुरक्षा और सार्वजनिक ढाँचे की कीमत पर नहीं होना चाहिए। सख़्त नियमों, जनजागरूकता और जिम्मेदार भागीदारी से पतंगबाज़ी फिर से सुरक्षित और उत्सवपूर्ण गतिविधि बन सकती है।
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