नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस के मौके पर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने मिर्गी (एपिलेप्सी) से जूझ रहे लोगों के प्रति जागरूकता, समझ और सामाजिक समावेश पर जोर दिया है। मंत्रालय ने समाज से अपील की कि मिर्गी से जुड़े कलंक को कम किया जाए और सहानुभूतिपूर्ण, सूचित बातचीत को बढ़ावा दिया जाए।

मिर्गी एक सामान्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें दौरे पड़ते हैं और मरीज के हाथ-पैर झटक सकते हैं, मुंह से झाग निकल सकता है और आंखें ऊपर की ओर उठ सकती हैं। अधिकांश मामलों में दवाओं और उचित इलाज से मिर्गी नियंत्रित की जा सकती है।

लेकिन कई हिस्सों में सामाजिक और सांस्कृतिक धारणाओं के कारण मरीजों को कलंक और गलत उपचार का सामना करना पड़ता है। कुछ लोग मिर्गी को बुरी आत्माओं, पिछले जन्म के पाप या अलौकिक शक्तियों से जोड़ते हैं, जिससे पीड़ितों का जीवन और कठिन हो जाता है।

मिर्गी शिक्षा, रोजगार, विवाह और सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक असर डालती है। केरल के सर्वेक्षण के अनुसार मिर्गी से पीड़ित 58 प्रतिशत लोग बेरोजगार हैं, जबकि सामान्य लोगों में यह आंकड़ा केवल 19 प्रतिशत है। इसका कारण कार्यस्थल पर दौरे, शिक्षा की कमी, दवाओं से थकान और बार-बार अनुपस्थिति है। नियोक्ता अक्सर मिर्गी वाले उम्मीदवारों को नौकरी देने में हिचकिचाते हैं, जिससे सामाजिक कलंक बढ़ता है और कई बार कम वेतन या बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है।

समय के साथ शिक्षा और सामाजिक स्तर में सुधार हुआ है, लेकिन मिर्गी के प्रति धारणा, कलंक और भेदभाव में खास बदलाव नहीं आया है। इससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ती हैं। इंडियन एपिलेप्सी एसोसिएशन के प्रयासों से भारतीय न्यायपालिका ने स्पष्ट किया है कि मिर्गी मानसिक बीमारी नहीं है और इसे तलाक का आधार नहीं माना जाना चाहिए।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मिर्गी के बोझ को कम करने के लिए जागरूकता, बेहतर देखभाल, रोकथाम, जन जागरूकता अभियान और मरीजों के लिए उपलब्ध कार्यक्रमों में सुधार जरूरी है। (With inputs from IANS)

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अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस का उद्देश्य मिर्गी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में फैले भ्रांतियों को दूर करना है।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.