भूख नहीं लगना आम बात है या चेतावनी? जानें इसके कारण

नई दिल्ली: आजकल कई लोगों में भूख न लगने की समस्या आम हो गई है। अक्सर इसे थकान, व्यस्त दिनचर्या या मानसिक तनाव का असर समझकर अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो यह शरीर के लिए चेतावनी का संकेत हो सकता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि भूख न लगना शरीर में किसी असंतुलन या स्वास्थ्य परेशानी का संकेत हो सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, जब पाचन शक्ति कमजोर होती है, तो भोजन में रुचि कम हो जाती है। विज्ञान भी कहता है कि हार्मोनल बदलाव, तनाव या किसी बीमारी के कारण मस्तिष्क और पेट का सिग्नल सही तरीके से काम नहीं करता, जिससे भूख महसूस नहीं होती।
सबसे आम कारणों में पाचन संबंधी समस्याएं हैं। पेट में गैस, एसिडिटी या कब्ज जैसी परेशानियों के कारण शरीर खाना कम मांगता है। आयुर्वेद इसे 'अजीर्ण' के रूप में देखता है। पाचन में कमजोरी होने पर पेट भारी महसूस होता है, जलन या असहजता रहती है और खाने की इच्छा कम हो जाती है।
बीमारियां भी भूख न लगने का प्रमुख कारण हैं। सर्दी-जुकाम, बुखार, वायरल इंफेक्शन, पेट की सूजन या फूड पॉइज़निंग जैसी स्थितियां शरीर को कमजोर कर देती हैं। इस दौरान शरीर ऊर्जा बचाने की कोशिश करता है और भोजन पचाने में रुचि कम हो जाती है।
मानसिक स्थिति और तनाव का असर भी भूख पर पड़ता है। ज्यादा चिंता, डिप्रेशन या उदासी हार्मोन को प्रभावित करती है। मस्तिष्क भूख का सिग्नल पेट तक सही तरीके से नहीं भेज पाता। आयुर्वेद इसे 'मन-आहार' के असंतुलन से जोड़ता है। जब मन परेशान होता है, तो शरीर की पाचन अग्नि कमजोर होती है और खाने में रुचि कम हो जाती है।
कुछ दवाइयां भी भूख को प्रभावित कर सकती हैं, जैसे एंटीबायोटिक्स, कैंसर की दवाएं, दर्द निवारक और डिप्रेशन की दवाइयां। ये दवाइयां पेट और मस्तिष्क के बीच हार्मोनल सिग्नल को बदल देती हैं, जिससे भूख कम महसूस होती है।
अगर भूख न लगना कई दिन तक बना रहे, वजन घटने लगे, कमजोरी महसूस हो या पोषण की कमी दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। (With inputs from IANS)


