Child Development: बच्चे के विकास में देरी तो नहीं? इन 'रेड फ्लैग्स' को न करें नजरअंदाज, डॉक्टर से जानें कब है चिंता की बात

हर बच्चा अपनी गति से बढ़ता है, लेकिन माता-पिता के तौर पर यह समझना जरूरी है कि कब 'इंतजार' करना सही है और कब डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य. बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके विकास के लिए 'स्वर्णिम काल' माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान ब्रेन में न्यूरल कनेक्शन सबसे तेजी से बनते हैं. अक्सर माता-पिता बच्चों के बोलने में देरी (Delayed Speech) को यह कहकर टाल देते हैं कि "उसके पिता भी देर से बोले थे." लेकिन डॉ. रफत त्रिवेदी के अनुसार, विकास का मतलब सिर्फ बोलना नहीं है. इसमें सामाजिक जागरूकता, गैर-मौखिक बातचीत (Non-verbal interaction) और व्यवहार भी शामिल है.
उम्र के अनुसार ध्यान देने की बातें
0-1 वर्ष की अवस्था
सोशल स्माइल (2-3 महीने)- अगर बच्चा आपको देखकर मुस्कुराता नहीं है या प्रतिक्रिया नहीं देता, तो यह शुरुआती संकेत हो सकता है.
आई कॉन्टैक्ट- नजरें न मिलाना या बातचीत में दिलचस्पी न लेना चिंता का विषय है.
नाम पर प्रतिक्रिया (9-12 महीने)-इस उम्र तक बच्चे अपना नाम पहचानने लगते हैं. अगर वह पुकारने पर नहीं मुड़ता, तो डॉक्टर से मिलें.
1-2 वर्ष की अवस्था
इशारे और शब्द (12-15 महीने)-इस उम्र तक बच्चा कम से कम एक अर्थपूर्ण शब्द बोलने लगता है. साथ ही, चीजों की तरफ उंगली से इशारा करना या 'बाय-बाय' करना जैसे संकेत आने चाहिए. नकल और खेल (18-20 महीने)-बच्चे बड़ों की नकल करना या खिलौनों के साथ 'प्रिटेंड प्ले' (जैसे गुड़िया को खाना खिलाना) शुरू कर देते हैं.
2 वर्ष की उम्र तक बड़े संकेत
अगर आपका बच्चा 2 साल का हो गया है और ये काम नहीं कर पा रहा, तो विशेषज्ञ की सलाह लें. दो शब्दों के वाक्य- "पानी चाहिए" या "मम्मा आओ" जैसे छोटे वाक्य न बोल पाना. अकेले रहना- अगर बच्चा सामाजिक मेलजोल के बजाय अकेले खेलना पसंद करता है. शारीरिक विकास- अगर बच्चा 2 साल तक स्वतंत्र रूप से चलने या दौड़ने में असमर्थ है.
किसी भी उम्र में दिखने वाले 'खतरे के निशान'
सबसे गंभीर संकेत 'रिग्रेशन' (Regression)है, यानी बच्चा वे चीजें भूलने लगे जो वह पहले सीख चुका था (जैसे शब्द बोलना या नजरें मिलाना). इसके अलावा, बार-बार हाथ फड़फड़ाना, गोल घूमना या खिलौनों के केवल एक हिस्से (जैसे पहिए) से ही खेलते रहना. तेज रोशनी, आवाज या किसी खास कपड़े के स्पर्श पर बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा होना.
अभिभावक क्या करें?
अगर आपको लगता है कि कुछ 'सही' नहीं है, तो अपनी अंतरात्मा (Instinct) पर भरोसा करें। 'वेट एंड वॉच' की सलाह पर बैठने के बजाय पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या डेवलपमेंटल पीडियाट्रिक से मिलें। समय पर की गई जांच और सपोर्ट बच्चे के भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है.


