बस कुछ मिनट की 'सांस फूलने' वाली मेहनत और टल जाएगा हार्ट अटैक व डिमेंशिया का खतरा! जानें क्या कहता है नया रिसर्च

आज की जो लाइफस्टाइल है ऐसे में हर डॉक्टर एक्सरसाइज करने कहते हैं. लेकिन ये करना मुश्किल होता है. समय की कमी और बिजी होने के कारण एक्सरसाइज करना मुश्किल होता है. अगर आप एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. रिसर्चर ने पाया है कि आप कितना चलते हैं, उससे कहीं अधिक यह मायने रखता है कि आप कितनी तेजी (Intensity) से चलते हैं. रोजाना बस कुछ मिनट की 'विगरस एक्टिविटी' (Vigorous Activity) यानी ऐसी मेहनत जिससे आपकी सांस फूलने लगे, हृदय रोग, डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और डायबिटीज के खतरे को नाटकीय रूप से कम कर सकती है.
क्या कहती है रिसर्च?
चीन की सेंट्रल साउथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मिनक्सुए शेन के नेतृत्व में इंटरनेशनल टीम ने यूके बायोबैंक (UK Biobank) के 96,000 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया. उन्होंने पाया कि जो लोग दिन भर में कुछ समय तेज एक्टिविटी करते हैं, उनमें डिमेंशिया का खतरा उन लोगों की तुलना में 63% कम पाया गया जो ऐसी गतिविधि नहीं करते. टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 60 प्रतिशत तक कम हो जाता है. मृत्यु के जोखिम में भी 46 प्रतिशत की कमी देखी गई.
क्यों है 'तेज मेहनत' इतनी खास?
प्रोफेसर शेन के अनुसार, जब आप इतनी मेहनत करते हैं कि आपकी सांस फूलने लगती है, तो शरीर में कई शक्तिशाली बदलाव होते हैं. दिल अधिक कुशलता से पंप करता है और रक्त वाहिकाएं लचीली बनती हैं. यह शरीर की अंदरूनी सूजन को कम करती है, जिससे अर्थराइटिस (गठिया) और सोरायसिस जैसी बीमारियों में राहत मिलती है. तेज एक्टिविटी ब्रेन में उन रसायनों को उत्तेजित करती है जो ब्रेन सेल्स को स्वस्थ रखते हैं.
जिम जाने की जरूरत नहीं: रोजमर्रा की जिंदगी में करें ये बदलाव
- बस पकड़ने के लिए दौड़ना-अगर आप बस या ट्रेन के लिए थोड़ा तेज दौड़ते हैं.
- सीढ़ियां तेजी से चढ़ना-लिफ्ट के बजाय तेजी से सीढ़ियां चढ़ें.
- तेज चलना-बाजार जाते समय या ऑफिस के काम के बीच थोड़ा तेज चलें.
- बच्चों के साथ खेलना-एक्टिव रूप से बच्चों के साथ भाग-दौड़ वाला खेल खेलें.
विशेषज्ञों का कहना है कि सप्ताह में केवल 15 से 20 मिनट की ऐसी मेहनत (यानी दिन में मात्र 2-3 मिनट) भी स्वास्थ्य के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है. हालांकि तेज गतिविधि फायदेमंद है, लेकिन बुजुर्गों या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. उनके लिए किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि, चाहे वह धीमी ही क्यों न हो, फायदेमंद है.


