सुस्ती और थकान से छुटकारा दिलाएगी कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया, इस तरह करें शुरू

आज की तेज रफ्तार और सुविधाजनक जीवनशैली ने जहां कामों को आसान बना दिया है, वहीं शारीरिक गतिविधियां काफी कम कर दी हैं. पहले रोजमर्रा के कामों में ही पर्याप्त शारीरिक मेहनत हो जाती थी, लेकिन अब अधिकतर काम मशीनों और तकनीक के सहारे हो रहे हैं. नतीजतन, लोग अक्सर थकान, सुस्ती और एकाग्रता की कमी महसूस करते हैं.
‘कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया’
स्वस्थ और फुर्तीले रहने के साथ दिमाग की एकाग्रता को बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार का सेनव, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली अपनाना बहुत आवश्यक है. इसी संदर्भ में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने ‘कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया’ को दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह दी है. मंत्रालय के अनुसार, यह योगिक क्रिया शरीर को स्फूर्तिवान बनाने के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक है.
आयुष मंत्रालय ने कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया को जीवन में लागू करने के साथ इसकी विधि के बारे में भी बताया, जिसे करने के लिए आप सबसे पहले अपने पैरों के बीच चार अंगुल का अंतर रखकर सीधे खड़े हो जाएं.
इसके बाद बारी-बारी से घुटने से नीचे वाले हिस्से को पीछे की ओर मोड़ते हुए एड़ी को नितंबों से स्पर्श कराएं. इसके बाद पैरों को धीरे-धीरे वापस अपनी जगह पर ले आएं. आयुष मंत्रालय ने सलाह दी कि आप शुरुआत में इस क्रिया को 20 से 25 बार करें. इसके बाद धीरे-धीरे संख्या अपने शरीर की क्षमता के अनुसार बढ़ाते रहें.
कुण्डलिनी शक्ति-विकासक क्रिया एक शक्तिशाली योगिक अभ्यास है, जिसे सुबह के समय प्रतिदिन नियमित रूप से करने से शरीर फुर्तीला होता है और दिमाग में ताजगी आती है. यह क्रिया दिनभर की थकान और सुस्ती को दूर करने में मदद कर सकती है। इससे काम के प्रति लोगों का फोकस बना रहता है.
Input IANS


