प्यार का न्यूरोसाइंस, आखिर क्यों और कैसे होता है हमें प्यार? जानें दिमागी सर्किट और हार्मोन्स का विज्ञान
फरवरी का महीना आते ही हर तरफ फूलों और चॉकलेट्स की चर्चा शुरू हो जाती है, लेकिन नोट्रे डेम यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंस विभाग में प्यार को एक अलग नजरिए से देखा जा रहा है. यहां 'द न्यूरोसाइंस ऑफ लव' कोर्स के जरिए छात्र यह समझ रहे हैं कि मानवीय जुड़ाव (Human Attachment) के पीछे कौन से दिमागी सर्किट, हार्मोन्स और व्यवहारिक शोध काम करते हैं.
क्या 'ऑक्सीटोसिन' वाकई 'लव हार्मोन' है?
रिसर्च एसोसिएट शांग ली बताते हैं कि अक्सर पॉप कल्चर में ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) को 'लव हार्मोन' कहा जाता है, जो कि पूरी तरह सही नहीं है. ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाने से कोई प्यार में नहीं गिरता, और न ही 'लव पोशन' (प्यार का शरबत) कहे जाने वाले परफ्यूम काम करते हैं. ऑक्सीटोसिन दरअसल 'सोशल सेलियंस' (Social Salience) को बढ़ाता है. यह सामाजिक संकेतों को अधिक सार्थक और महत्वपूर्ण बनाता है, जिससे जुड़ाव महसूस करना आसान होता है.
कफिंग सीजन (Cuffing Season) का साइज
कोर्स के दौरान 'कफिंग सीजन' (सर्दियों में पार्टनर की तलाश तेज होना) पर भी चर्चा की गई. डेटिंग ऐप्स के डेटा से पता चलता है कि नए साल के पहले वीकेंड पर डेटिंग गतिविधियों में भारी उछाल आता है. छात्र इस बात का विश्लेषण करते हैं कि कैसे पर्यावरण, संस्कृति और जीव विज्ञान मिलकर हमारे रोमांटिक व्यवहार को आकार देते हैं.
आकर्षण के पीछे छिपे साइंटिफिक कारण
सीनियर न्यूरोसाइंस छात्र ब्रॉडी रोल्स्टन के अनुसार, जिन चीजों को हम इत्तेफाक मानते हैं, उनके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण होते हैं. किसी के टी-शर्ट की गंध से लेकर पीरियड्स साइकिल (Menstrual Cycle) के चरण तक, सब कुछ इस बात को प्रभावित कर सकता है कि हम किसकी ओर आकर्षित होते हैं. हार्मोनल गर्भनिरोधक (Contraceptives) भी पार्टनर के चुनाव और बॉन्डिंग को प्रभावित कर सकते हैं.
भविष्य का प्यार: AI और रोबोट्स
यह कोर्स भविष्य के रिश्तों पर भी रोशनी डालता है। शोध बताते हैं कि इंसानों में AI चैटबॉट्स और सोशल रोबोट्स के साथ बातचीत करते समय भी ऑक्सीटोसिन रिलीज हो सकता है. यह तकनीक आने वाले समय में अंतरंगता, साथ और साझेदारी की परिभाषा को बदल सकती है.


