Oral Cancer Awareness 2026: क्या आपके मुंह का छाला भी है 'कैंसर' का संकेत? जानें 14 दिनों वाला यह जरूरी नियम

कैंसर के मामले दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं. ताजा आंकडों के मुताबिक, भारत में कैंसर के कुल मामलों में लगभग 30 प्रतिशत मामले ओरल कैंसर (Oral Cancer) के होते हैं. 2026 में दंत चिकित्सा (Dentistry) केवल दांतों को भरने तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब फोकस 'म्यूकोसल स्क्रीनिंग' और कैंसर की जल्द पहचान पर है. केंचंम्मा की तरह समय पर पहचान होने से बड़ी सर्जरी के बजाय छोटे इलाज से जान बचाई जा सकती है.
ओरल कैंसर होने के कारण (Etiology)
- केवल तंबाकू ही कैंसर की वजह नहीं है, इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं.
- धूम्रपान और सुपारी चबाने से जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.
- यह एक विलायक (Solvent) के रूप में काम करता है, जिससे कैंसरकारी तत्व मुंह की परतों में आसानी से घुस जाते हैं.
- युवाओं में ओरोफरीन्जियल कैंसर के लिए HPV 16 और 18 स्ट्रेन जिम्मेदार पाए जा रहे हैं.
- केंचंम्मा की तरह, दांतों की नुकीली सतह से होने वाली लगातार जलन भी कैंसर का कारण बन सकती है.
लक्षण: '2 हफ्ते का नियम' (The Two-Week Rule)
ओरल कैंसर की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती चरणों में इसमें दर्द नहीं होता. डेंटिस्ट के अनुसार, इन संकेतों पर गौर करें अगर कोई भी छाला जो 14 दिनों से अधिक समय तक बना रहे. गाल या जीभ पर ऐसे निशान जिन्हें खुरच कर हटाया न जा सके (Leukoplakia). गाल या जीभ में किसी हिस्से का सख्त महसूस होना. बिना किसी मसूड़े की बीमारी के दांतों का अचानक हिलना.
2026 की नई तकनीक: VELscope और AI
अब कैंसर की पहचान के लिए डेंटिस्ट VELscope जैसी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं. यह एक विशेष नीली रोशनी (Blue Light) छोड़ती है. स्वस्थ कोशिकाएं इसमें 'हरी' चमकती हैं, जबकि कैंसर वाली कोशिकाएं 'काली' दिखाई देती हैं. इसके अलावा, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वाले कैमरों से अब रियल-टाइम में यह पता चल जाता है कि कोई घाव कितना खतरनाक है.


