अंगदान केवल बड़ों के लिए नहीं, बच्चे भी बन सकते हैं अंगदाता, एक साहसी फैसला बचा सकता है कई जानें - डॉ सूनू उदानी

जब भी अंगदान (Organ Donation) की बात होती है, तो हमारा ध्यान अक्सर वयस्कों पर ही जाता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि बच्चे भी अंगदाता बन सकते हैं और कई जिंदगियां बचा सकते हैं. जागरूकता की कमी के कारण देश भर में हजारों बच्चे और वयस्क अंग प्रत्यारोपण (Transplant) के इंतजार में दम तोड़ देते हैं. राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर, इस महत्वपूर्ण सत्य को समझना जरूरी है. बच्चों का अंगदान संभव है, नैतिक है और अक्सर जीवन रक्षक साबित होता है.
बच्चों का अंगदान क्यों महत्वपूर्ण है?
अंगों का फेल होना (Organ failure) किसी भी उम्र में हो सकता है. नवजात शिशु और छोटे बच्चे अक्सर जन्मजात हृदय दोष, लिवर फेलियर या किडनी की बीमारियों से जूझते हैं, जिनका एकमात्र इलाज प्रत्यारोपण होता है. कई मामलों में, एक बच्चे को दूसरे बच्चे का ही अंग पूरी तरह मेल खाता है, जो उसके लिए जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी बन जाता है.
बच्चा अंगदाता कब बन सकता है?
वयस्कों की तरह, बच्चे भी 'ब्रेन डेथ' (Brain Death) के मामलों में अंगदान कर सकते हैं. यह किसी गंभीर दुर्घटना या ब्रेन हेमरेज के कारण हो सकता है. यह वह स्थिति है जहां दिमागके सभी कार्यों ने स्थायी रूप से काम करना बंद कर दिया है, भले ही मशीनों के जरिए हृदय और सांसें चल रही हों. विशेषज्ञों की एक टीम गहन परीक्षण करती है ताकि रिकवरी की कोई भी संभावना न रहे. इन डॉक्टरों का अंग प्राप्त करने वाले मरीजों से कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं होता है. माता-पिता की सहमति से बच्चे का हृदय, लिवर, किडनी, फेफड़े और यहाँ तक कि ऊतक (Tissues) भी दान किए जा सकते हैं.
भावनात्मक झिझक और भ्रांतियों को दूर करना
अपने बच्चे को खोने के समय अंगदान का निर्णय लेना किसी भी माता-पिता के लिए सबसे कठिन काम है. लेकिन, कई परिवार बाद में इसे अपनी त्रासदी में 'जीवन का अर्थ' खोजने के तरीके के रूप में देखते हैं.
अंगदान से जुड़ी कुछ मुख्य भ्रांतियां और सच
क्या बच्चों के अंग प्रभावी नहीं होते? नहीं बच्चों के अंग वयस्कों और बच्चों दोनों के काम आ सकते हैं. अंगदान से शरीर विकृत हो जाता है. लेकिन सच ये है कि यह प्रक्रिया पूरी गरिमा और सम्मान के साथ की जाती है, जिससे शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता. अंगदान की चर्चा होने पर इलाज में लापरवाही बरती जाती है. लेकिन ऐसा नहीं है डॉक्टर हमेशा पहले बच्चे की जान बचाने को प्राथमिकता देते हैं.
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