गर्भावस्था में एंटीडिप्रेसेंट छोड़ना हो सकता है खतरनाक, रिसर्च में मेंटल हेल्थ को लेकर बड़ी चेतावनी

अमेरिका जैसे देशों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality) का सबसे बड़ा कारण खराब मानसिक स्वास्थ्य है. अक्सर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं और एंटीडिप्रेसेंट (डिप्रेशन की दवाएं) लेना बंद कर देती हैं. लेकिन हालिया शोध एक डरावनी तस्वीर पेश करते हैं: जो महिलाएं गर्भावस्था में अपनी दवाएं छोड़ देती हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य आपातकाल (Mental Health Emergency) का खतरा दोगुना बढ़ जाता है.
अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े
2023 और 2024 के बीच प्रसव कराने वाली लगभग 4,000 महिलाओं पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 64.6% महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान कम से कम 60 दिनों के लिए अपनी दवाएं बंद कर दीं. केवल 17.6% महिलाओं ने बिना किसी रुकावट के अपनी दवाएं जारी रखीं. जैसे-जैसे गर्भावस्था के महीने (Trimesters) बढ़ते गए, दवा छोड़ने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ती गई.
दुष्प्रभाव- दवा बंद करने वाली महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का जोखिम उन महिलाओं की तुलना में लगभग **दो गुना अधिक** था, जिन्होंने उपचार जारी रखा। यह जोखिम गर्भावस्था के पहले और नौवें महीने में सबसे अधिक देखा गया.
क्या SSRI दवाएं बच्चे के लिए सुरक्षित हैं?
अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सिलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (SSRI) दवाओं का उपयोग भ्रूण के लिए हानिकारक नहीं पाया गया है। पिछले शोधों के अनुसार, इन दवाओं का संबंध:
- जन्मजात विकारों (Congenital abnormalities) से नहीं है.
- भ्रूण के विकास की समस्याओं से नहीं है.
- लंबे समय तक रहने वाले विकासात्मक मुद्दों (Developmental issues) से भी नहीं है.
- उपचार न कराने के गंभीर जोखिम
अगर गर्भावस्था के दौरान डिप्रेशन या एंग्जायटी का इलाज नहीं किया जाता है, तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं. आत्महत्या का विचार, प्री-एक्लेम्पसिया (High BP). समय से पहले जन्म (Preterm birth) और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना.
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती
आजकल हर पांच में से एक महिला गर्भावस्था में प्रवेश करते समय पहले से ही एंग्जायटी या डिप्रेशन की शिकार होती है. शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि गर्भावस्था के दौरान मानसिक स्वास्थ्य के उपचार को रोकना नहीं चाहिए. इसे एक 'पब्लिक हेल्थ प्रायोरिटी' के रूप में देखा जाना चाहिए ताकि दवाओं के निरंतर सेवन को बढ़ावा दिया जा सके और मातृ मृत्यु दर के संकट को कम किया जा सके.


