नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की हालिया रिपोर्ट नवजात मृत्युदर की चिंताजनक स्थिति को उजागर करती है। रिपोर्ट के अनुसार, नवजात मौतों को कम करने के लिए चल रहे वैश्विक प्रयासों की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जिससे लाखों बच्चों का जीवन अब भी जोखिम में है।

यह रिपोर्ट 17 मार्च 2026 को जारी की गई थी।रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में करीब 23 लाख नवजातों की मौत हुई (एक अनुमान के अनुसार स्थिति अब भी बदली नहीं है)। ये वे बच्चे हैं जो मात्र 28 दिन या उससे कम के होते हैं। पिछले दो दशकों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में कमी आई थी, लेकिन नवजातों के मामले में यह गिरावट उतनी तेज नहीं रही। यही वजह है कि अब कुल बाल मृत्यु दर में नवजातों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात मृत्यु दर को कम करना एक जटिल चुनौती है, क्योंकि इसमें स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, समय पर देखभाल और संसाधनों की उपलब्धता जैसे कई कारक शामिल होते हैं। खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहां स्वास्थ्य ढांचा पहले से ही कमजोर है।

अफ्रीकी देशों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां हर साल लगभग 11 लाख नवजात अपनी जान गंवा देते हैं। मौतों के पीछे प्रमुख कारणों में समय से पहले जन्म, प्रसव संबंधी जटिलताएं और संक्रमण शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से बड़ी संख्या में मौत रोकी जा सकती है, अगर गर्भावस्था और जन्म के समय उचित देखभाल सुनिश्चित की जाए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में कमी आई है। साथ ही कई देशों में राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते मातृ और शिशु स्वास्थ्य को उतना महत्व नहीं मिल पा रहा है। कोविड-19 महामारी और वैश्विक आर्थिक दबाव ने भी स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त असर डाला, जिससे प्रगति और धीमी हो गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नवजातों की जान बचाने के लिए बड़े और जटिल उपायों की जरूरत नहीं है, बल्कि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना ही सबसे प्रभावी कदम हो सकता है। इसमें प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में सुरक्षित प्रसव, जन्म के तुरंत बाद शिशु की देखभाल और संक्रमण से बचाव के उपाय शामिल हैं।

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस दिशा में तुरंत ठोस कदम नहीं उठातीं, तो 2030 तक शिशु मृत्यु दर घटाने के वैश्विक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। (With inputs from IANS)

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धीमी वैश्विक प्रगति के कारण नवजात मृत्यु दर अब भी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.