12 साल से पहले बच्चों को स्मार्टफोन देना खतरनाक? नई स्टडी में डिप्रेशन और मोटापे को लेकर बड़ा खुलासा

बच्चों के लिए स्मार्टफोन एक लत और पैरेंट्स के लिए सिरदर्द बन चुकी है. कई पैरेंट्स बच्चों को फोन से दूर रखना चाहते हैं, लेकिन ये इतना आसान नहीं है. कम उम्र में हर डॉक्टर यही सजेस्ट करते हैं कि 2 साल तक बच्चों का स्क्रीन टाइम जीरो होना चाहिए. वहीं 2 साल से 5 साल तक के बच्चों के लिए 1 घंटा. माता-पिता अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि बच्चे को स्मार्टफोन देने की सही उम्र क्या है. जहां बच्चे लगातार फोन की मांग करते हैं, वहीं शोधकर्ता इसके संभावित नुकसानों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं. हाल ही में 'पीडियाट्रिक्स' जर्नल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है.
12 साल से कम उम्र और स्वास्थ्य जोखिम
'एडोलेसेंट ब्रेन कॉग्निटिव डेवलपमेंट स्टडी' (ABCD Study) के तहत 10,500 से अधिक बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया गया. यह अमेरिका में बच्चों के दिमागी विकास पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा लॉन्ग टर्म रिसर्च है. रिसर्च के मुख्य निष्कर्ष डराने वाले हैं. जिन बच्चों को 12 साल से पहले स्मार्टफोन मिला, उनमें डिप्रेशन (अवसाद) के लक्षण अधिक पाए गए. जल्दी फोन मिलने से बच्चों में मोटापे (Obesity) का जोखिम काफी बढ़ गया. स्मार्टफोन के इस्तेमाल से बच्चों की नींद की गुणवत्ता और समय दोनों प्रभावित हुए.
एज मायने रखती है
स्टडी के अनुसार, बच्चा 12 साल से जितनी कम उम्र में फोन पाता है, खतरा उतना ही ज्यादा होता है. रिसर्चर डॉ. बरज़िले (Dr. Barzilay) का कहना है कि 12 साल और 16 साल के बच्चे के मानसिक विकास में जमीन-आसमान का अंतर होता है. किशोरावस्था (Adolescence) एक बहुत ही संवेदनशील समय है, जहां नींद या मेंटल हेल्थ में मामूली बदलाव भी स्थायी प्रभाव डाल सकते हैं.
स्मार्टफोन कैसे डालता है बुरा असर?
हालांकि यह अध्ययन केवल एक संबंध (Association) दिखाता है, सीधा कारण नहीं, लेकिन पिछले शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन आने के बाद बच्चे दोस्तों के साथ व्यक्तिगत रूप से समय कम बिताते हैं. शारीरिक व्यायाम या खेलकूद कम कर देते हैं. देर रात तक फोन चलाने के कारण पर्याप्त नींद नहीं ले पाते.


