पेट में बढ़ती एसिडिटी का कारण हो सकते हैं प्राकृतिक से मिले ये फल, जानें सेवन से जुड़ी सावधानियां

आज की जीवनशैली की वजह से पेट संबंधी रोग हर उम्र के लोगों को परेशान करने लगे हैं. कुछ भी खाने के तुरंत बाद गैस, पेट फूलना और हल्के पेट दर्द की शिकायत देखी जाती है. पेट की पाचन अग्नि को आराम देने के लिए लोग शीतलता देने वाले फलों का सेवन करते हैं, लेकिन कई बार फल खाने के बाद भी पेट की जलन और एसिडिटी बढ़ने लगती है, लेकिन ऐसा क्यों?
फल भी एसिडिटी पैदा करने वाले होते हैं
पेट को ठंडक देने और जलन से बचाने के लिए सही फलों का सेवन करना जरूरी है. बहुत कम लोग जानते हैं कि फल भी एसिडिटी पैदा करने वाले होते हैं. कुछ फलों में साइट्रिक एसिड अधिक मात्रा में होता है, जिसके सेवन से गैस और सीने में जलन की परेशानी होती है. आज हम ऐसे ही फलों की जानकारी लेकर आए हैं, जिनका सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। पहला है संतरा. संतरे में साइट्रिक एसिड की अधिक मात्रा होती है, जिससे अधिक सेवन से एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन पैदा हो सकती है. इसलिए अगर पेट संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं तो संतरे का सेवन कम करें.
इन फलों से हो सकता है एसिडिटी
दूसरा है नींबू। नींबू में साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, जो सीने में जलन पैदा करता है और गैस्ट्रिक एसिड का उत्पादन बढ़ जाता है, खासकर खाली पेट होने पर. इसलिए नींबू का सेवन सीमित मात्रा में करें. तीसरा है, अनानास। अनानास का गुण अम्ल और तीक्ष्ण होता है और सेवन से पित्त की वृद्धि होती है. ऐसे में अगर आंतों से जुड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं तो अनानास का सेवन करने से बचे क्योंकि अनानास में मौजूद एंजाइम और अम्ल संवेदनशील आंत की परत को परेशान कर सकते हैं.
लिमिट में करें इन फलों का सेवन
चौथा है कच्चा आम. कच्चा आम का गुण अम्ल और भारी होता है. इसे पचाने के लिए पेट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसके सेवन से कफ और वात की वृद्धि होती है. अपच की समस्या भी बन सकती है. पांचवा है खट्टे अंगूर. खट्टे अंगूर का गुण अम्लीय होता है और पित्त की वृद्धि करता है, ऐसे में पेट फूलना और गैस बनने की परेशानी हो सकती है, इसलिए अगर पाचन मंद है तो अंगूर या खट्टे फलों का सेवन सीमित मात्रा में करें.
इसके अलावा अमरूद का सेवन अगर बीज सहित करते हैं, तो यह भी पाचन में बाधा करता है. बीज सहित अमरूद का सेवन पेट फूलने की समस्या पैदा कर सकता है. इसके अलावा, जामुन और बेरी के सेवन से भी परहेज करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, खट्टे और तीखे फल पित्त को बढ़ाते हैं और अग्नि को कमजोर करते हैं.
Input IANS


