दिमाग की 100% क्षमता का इस्तेमाल, एम्स के न्यूरोसर्जन ने खोले दिमाग की रीवायरिंग और वैदिक विज्ञान के राज

आज के डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया और एआई (AI) का बोलबाला है, हमारी सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि हमारी मानसिक क्षमताओं का कम होना है. हाल ही में एम्स के एक वरिष्ठ न्यूरोसर्जन ने एक पॉडकास्ट के दौरान बताया कि कैसे "डोपामिन हाईजैकिंग" हमारी नई पीढ़ी की बौद्धिक क्षमता को नष्ट कर रही है और कैसे हम अपने दिमाग को फिर से 'रीवायर' (Rewire) कर सकते हैं.
डोपामिन हाईजैकिंग और सोशल मीडिया का खतरा
डॉक्टर के अनुसार, हमारी नई पीढ़ी सोशल मीडिया की लत के कारण अपनी बौद्धिक क्षमता खो रही है. लगातार शॉर्ट वीडियो और नोटिफिकेशन हमारे दिमाग में डोपामिन का स्तर बढ़ा देते हैं, जिसे 'डोपामिन हाईजैकिंग' कहा जाता है. इससे उबरने का एकमात्र प्रभावी तरीका मेडिटेशन (ध्यान) है, जो मस्तिष्क को शांति और स्थिरता प्रदान करता है.
वैदिक मंत्रों की शक्ति और ऑडिटरी इंटेलिजेंस
दिमाग की क्षमता को 10 गुना या 100 गुना बढ़ाने के लिए डॉक्टर ने वैदिक मंत्रोच्चार (Vedic Chanting) की सलाह दी है. उनके अनुसार, वैदिक मंत्रों का उच्चारण न केवल आपकी स्मरण शक्ति (Memory) बढ़ाता है, बल्कि यह ऑडिटरी इंटेलिजेंस (सुनने की समझ) को भी विकसित करता है.यह प्राचीन विज्ञान आज के आधुनिक न्यूरोसाइंस के साथ तालमेल बिठाता है.
दिमाग के दो भाग: अर्धनारीश्वर का विज्ञान
- दायां मस्तिष्क (Right Brain)- यह 'नारी' (फेमिनिन) शक्ति और रचनात्मकता (Creativity) का प्रतीक है। इसे माँ दुर्गा के रूप में देखा जा सकता है.
- बायां मस्तिष्क (Left Brain)-यह तर्क, तर्कशास्त्र (Logic) और गणना का हिस्सा है, जिसे 'पुरुष' (मेल) भाग कहा जाता है.
- महिलाओं का दायां मस्तिष्क अधिक सक्रिय होता है, जिसके कारण वे दिशाओं, रचनात्मकता और स्पेस ओरिएंटेशन (जैसे इंटीरियर डेकोरेशन) में अधिक कुशल होती हैं.
बुद्धि कम होने के शारीरिक कारण
अक्सर हम मानसिक कमजोरी को केवल आदतों से जोड़ते हैं, लेकिन डॉक्टर ने बताया कि विटामिन B12 और विटामिन D की कमी भी बौद्धिक स्तर को कम कर सकती है. भारत में पर्याप्त धूप होने के बावजूद बहुत से लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है.
इंटेलिजेंस का सही पैरामीटर
डॉक्टर का मानना है कि हर व्यक्ति की क्षमता अद्वितीय होती है. अगर कोई पढ़ाई में अच्छा नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह बुद्धिमान नहीं है. उन्होंने उदाहरण दिया कि मछली को पेड़ पर चढ़ने की क्षमता से नहीं मापा जाना चाहिए. हमें व्यक्ति की विशिष्ट क्षमताओं को पहचानने और उन्हें विकसित करने की जरूरत है.


