आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में डीप फ्राई यानी तले-भुने खाद्य पदार्थ लोगों की रोज़मर्रा की थाली का हिस्सा बन चुके हैं। समोसे, पकौड़े, चिप्स, पूरी, कचौड़ी जैसे खाद्य पदार्थ बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आते हैं। स्वाद के लिहाज़ से ये भले ही आकर्षक हों, लेकिन इनके पीछे छिपे स्वास्थ्य जोखिमों पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। खासकर, तले-भुने भोजन में इस्तेमाल होने वाला तेल अगर सही न हो या गलत तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह शरीर के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है।

जब किसी तेल को बार-बार तेज़ आंच पर गर्म किया जाता है, तो उसमें ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है। इस दौरान तेल में फ्री रेडिकल्स और ट्रांस फैट की मात्रा बढ़ने लगती है। ये तत्व शरीर के लिए विषैले होते हैं और पाचन तंत्र पर सीधा असर डालते हैं। लंबे समय तक ऐसे तेल का सेवन करने से पेट, आंतों और लीवर से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, बार-बार गर्म किया गया तेल पाचन अग्नि को कमजोर करता है और शरीर में ‘आम’ यानी विषैले तत्वों का निर्माण करता है। यही आम आगे चलकर मोटापा, जोड़ों में दर्द, थकान, सुस्ती और कई पुरानी बीमारियों की वजह बन सकता है। अधिक मात्रा में तले-भुने भोजन का सेवन हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर के खतरे को भी बढ़ा देता है।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि डीप फ्राइंग और रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए कौन से तेल अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं। आयुर्वेद में देसी घी, नारियल तेल, सरसों का तेल और मूंगफली का तेल बेहतर विकल्प माने गए हैं। देसी घी का स्मोक पॉइंट काफी अधिक होता है और उच्च तापमान पर भी इसके गुण अपेक्षाकृत सुरक्षित रहते हैं। नारियल तेल में सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह बार-बार गर्म करने पर भी जल्दी खराब नहीं होता। मूंगफली का तेल भी उच्च तापमान सहने की क्षमता रखता है, हालांकि इसे भी बार-बार गर्म करने से बचना चाहिए।

वहीं, कुछ तेल ऐसे हैं जिनका डीप फ्राइंग में उपयोग सीमित रखना चाहिए। सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, कॉर्न ऑयल, राइस ब्रान ऑयल और ऑलिव ऑयल तेज़ तापमान पर जल्दी ऑक्सीडाइज हो जाते हैं, जिससे हानिकारक तत्व बनने की संभावना बढ़ जाती है।

आयुर्वेद में डीप फ्राइंग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम भी बताए गए हैं। जैसे, एक ही तेल को बार-बार इस्तेमाल न करें, धुआं उठने के बाद तेल का प्रयोग न करें, अलग-अलग तेलों को आपस में न मिलाएं, तले हुए तेल को छानकर ही दोबारा उपयोग में लाएं और हमेशा मोटे तले वाले बर्तन में ही तलने का काम करें।

अगर स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ध्यान रखा जाए, तो सही तेल का चयन और सही तरीके से डीप फ्राइंग करना बेहद जरूरी है। इससे न केवल बीमारियों का खतरा कम होता है, बल्कि शरीर लंबे समय तक स्वस्थ भी बना रहता है।

With Inputs From IANS

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आज की जीवनशैली में डीप फ्राई यानी तले-भुने खाद्य पदार्थ आम हो गए हैं। बच्चे हों या बड़े, लगभग सभी इन्हें पसंद करते हैं
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.