नई दिल्ली: नींद हमारे जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकताओं में से एक है, ठीक उसी तरह जैसे भोजन, पानी और सांस लेना। हालांकि आज के आधुनिक जीवनशैली में लाखों लोग नींद की कमी या नींद की गुणवत्ता में कमी (Sleep Deficiency) की समस्या से जूझ रहे हैं, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, कामकाज और दैनिक जीवन की सुरक्षा पर गंभीर असर डाल रही है।

नींद हमारे शरीर और मस्तिष्क को रिचार्ज करने का सबसे प्रभावशाली तरीका है। जब व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार पर्याप्त नींद नहीं ले पाता, तो इसे नींद की कमी या स्लीप डेफिशिएंसी कहा जाता है। वहीं, नींद का पूरा अभाव या स्लीप डेप्रिवेशन और भी गंभीर स्थिति है।

नींद की कमी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे पर्याप्त समय तक सो न पाना, दिन के गलत समय पर सोना (जैसे शिफ्ट वर्क), नींद की गुणवत्ता खराब होना, या किसी स्लीप डिसऑर्डर जैसे अनिद्रा, स्लीप एप्निया आदि का होना। ये सभी स्थितियां शरीर और मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित करती हैं।

नींद की कमी का असर केवल थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यक्ति के ध्यान, सीखने की क्षमता, प्रतिक्रिया देने की क्षमता और सामाजिक व्यवहार पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नींद की कमी से व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को समझने में असमर्थ हो सकता है और अक्सर चिड़चिड़ापन, निराशा या चिंता महसूस कर सकता है।

बच्चों में नींद की कमी के लक्षण अलग होते हैं। वे ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ हो सकते हैं, स्कूल में प्रदर्शन कमजोर हो सकता है और व्यवहार में असामान्यता दिख सकती है। वयस्कों में थकान, सिरदर्द, मूड स्विंग्स और कार्यकुशलता में कमी आम होती है।

यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। नींद की कमी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, स्ट्रोक, मोटापा, किडनी की बीमारी और अवसाद जैसी गंभीर समस्याओं से जुड़ी हुई है। इसके अलावा यह दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाती है; नींद की कमी में गाड़ी चलाना शराब पीने जितना खतरनाक हो सकता है। बुजुर्गों में गिरने और हड्डी टूटने का जोखिम भी बढ़ जाता है।

एक आम गलतफहमी यह है कि लंबे समय तक कम नींद लेने की आदत पड़ जाने पर कोई नुकसान नहीं होता। हालांकि शोध बताते हैं कि पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए नींद की कमी को दूर करने और बेहतर नींद सुनिश्चित करने के उपाय अपनाना आवश्यक है।

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, रोजाना एक ही समय पर सोना और उठना बेहद महत्वपूर्ण है, वीकेंड पर भी। सोने से 1-2 घंटे पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप जैसी स्क्रीन डिवाइस बंद कर दें। बेडरूम को अंधेरा, शांत और ठंडा रखें। कैफीन युक्त पेय जैसे चाय और कॉफी शाम के बाद न लें।

नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से 5-6 घंटे पहले। सोने से पहले आरामदायक रूटीन अपनाएं, जैसे गर्म स्नान, किताब पढ़ना या ध्यान करना। तनाव कम करने के लिए योग या गहरी सांस लेने की तकनीकें अपनाएं। यदि इन उपायों के बावजूद नींद की समस्या लगातार बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

इन सरल उपायों और जीवनशैली बदलावों के माध्यम से हम नींद की कमी और स्लीप डेप्रिवेशन के प्रभाव को कम कर सकते हैं और मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं। (With inputs from IANS)

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विश्व निद्रा दिवस पर जानें नींद की कमी और उससे जुड़ी समस्याओं के लक्षण, प्रभाव और उन्हें दूर करने के आसान उपाय।
Kanchan Chaurasiya
Kanchan Chaurasiya

Kanchan Chaurasiya joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Marketing Coordinator. She holds a Bachelor's degree in Arts from Delhi University and has completed certifications in digital marketing. With a strong interest in health news, content creation, hospital updates, and emerging trends, Kanchan manages social media, news coverage, and public relations activities. She coordinates media outreach, creates press releases, promotes healthcare professionals and institutions, and supports health awareness campaigns to ensure accurate, engaging, and timely communication for the medical community and the public.