विश्व टीबी दिवस: जागरूकता से टीबी उन्मूलन अब संभव

नई दिल्ली: टीबी एक गंभीर और संक्रामक रोग है, जो समय पर उपचार न मिलने पर खतरनाक रूप ले सकता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है और हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो बैक्टीरिया हवा में फैल जाते हैं, जिन्हें आसपास के लोग सांस के जरिए अपने शरीर में ले सकते हैं, विशेषकर कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग अधिक जोखिम में रहते हैं।हर साल 24 मार्च को पूरे विश्व में टीबी दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को टीबी के खतरे, सावधानी और उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके।
समय पर इलाज और सही सावधानी अपनाने से यह बीमारी पूरी तरह नियंत्रित की जा सकती है। संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनना, संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना और समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है। टीबी का इलाज लंबा हो सकता है लेकिन पूरी दवा और उपचार समय पर लेने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
विश्व टीबी दिवस 2026 का थीम है "हां, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं।" अगर सरकार, स्वास्थ्य संगठन, डॉक्टर्स और समाज मिलकर जागरुकता फैलाएं, निवेश करें और सहयोग करें, तो टीबी जैसी संक्रमक बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। यह थीम उम्मीद और कार्रवाई का संदेश देती है। अगर देशों के नेता, नीति निर्माता और आम लोग मिलकर काम करें, नई डब्ल्यूएचओ सिफारिशों और तकनीकों को अपनाएं, और मजबूत सहयोग करें, तो टीबी को खत्म करना असंभव नहीं है।
यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 24 मार्च 1882 को रॉबर्ट कोच ने माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की खोज की थी। इस खोज ने टीबी के निदान और उपचार में नई राह खोली। इसी कारण 1982 में डब्ल्यूएचओ और इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरकुलोसिस एंड लंग डिजीज ने 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। यह दिन सिर्फ बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने का नहीं है बल्कि टीबी के खिलाफ सामूहिक प्रयास और सहयोग को प्रोत्साहित करने का भी है।
इसके अलावा, टीबी के इलाज में सही खानपान और जीवनशैली भी मददगार होती है। प्रोटीन, विटामिन और आयरन युक्त आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और शरीर को संक्रमण से लड़ने में सक्षम बनाते हैं। टीबी मरीजों को धूम्रपान और शराब से दूर रहना चाहिए। (With inputs from IANS)


