बच्चों में पेट के कीड़े, लक्षण, खतरे और बचाव के असरदार उपाय

भारत में बच्चों के बीच पेट के कीड़े (Helminthic Infestation) एक आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली स्वास्थ्य समस्या है. ये परजीवी कीड़े न केवल पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं, बल्कि फेफड़ों, लिवर और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी व्यापकता लगभग 91% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वच्छता के कारण यह 33% के करीब है.
संक्रमण कैसे फैलता है?
पेट के कीड़े शरीर में दो प्रमुख रास्तों से प्रवेश करते हैं. संक्रमित भोजन, पानी, मिट्टी या बिना धुले हाथों के जरिए कीड़ों के अंडे शरीर में चले जाना. नंगे पैर मिट्टी में खेलने से कीड़ों के लारवा सीधे त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं.
प्रमुख लक्षण और संकेत
शुरुआत में कई बच्चों में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन कीड़ों की संख्या बढ़ने पर निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं. पेट दर्द, ऐंठन, दस्त, गैस और मतली. भूख न लगना, जिससे वजन कम होना और थकान महसूस होना. रात के समय गुदा मार्ग (Perianal) में खुजली होना (विशेषकर पिनवर्म के मामले में).
गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं
हुकवर्म और व्हिपवर्म आंतों से खून चूसते हैं, जिससे आयरन की कमी हो जाती है. बच्चा पीला दिखने लगता है, पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाता और जल्दी थक जाता है. कुछ बच्चे चॉक, मिट्टी, कागज या कच्चे चावल जैसी चीजें खाने लगते हैं. विटामिन B12 की कमी और नींद की कमी के कारण बच्चों की लंबाई रुक सकती है और उनका संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) धीमा हो सकता है. राउंडवर्म फेफड़ों में पहुँचकर खांसी और सांस फूलने का कारण बन सकते हैं, जबकि टेपवर्म मस्तिष्क तक पहुंचकर दौरे (Seizures) और सिरदर्द पैदा कर सकते हैं.
बचाव और उपचार के तरीके
- कीड़ों के चक्र को तोड़ने के लिए केवल बच्चे का ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार का डीवर्मिंग (Deworming) करना जरूरी है.
- हमेशा शौचालय का उपयोग करें और शौच के बाद व खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं.
- बच्चों के नाखून छोटे और साफ रखें.
- फल-सब्जियों को अच्छे से धोएं और हमेशा ढका हुआ व पका हुआ भोजन ही खाएं.
- हमेशा उबला हुआ या RO फिल्टर का पानी पिएं.
- बाहर खेलते समय हमेशा चप्पल या जूते पहनें.
- सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार साल में दो बार डीवर्मिंग की दवा लें.


