नेचुरल पेन किलर है लौंग, दांत दर्द से माइग्रेन तक में कारगर

नई दिल्ली: दांतों में तेज़ दर्द हो या माइग्रेन का असहनीय सिरदर्द, ऐसी स्थिति में व्यक्ति का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। कई बार दर्द निवारक दवाइयाँ भी अपेक्षित राहत नहीं दे पातीं, या फिर उनके साइड इफेक्ट की चिंता बनी रहती है। ऐसे में आयुर्वेद एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपाय के रूप में लौंग को सामने रखता है। लौंग को प्राकृतिक पेन किलर माना जाता है, जो दर्द को जड़ से शांत करने में मदद करती है और आमतौर पर इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते।
आयुर्वेद के अनुसार, दांत दर्द, माइग्रेन, सर्दी-खांसी, पेट दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में घरेलू और प्राकृतिक उपायों को प्राथमिकता देना अधिक लाभकारी होता है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी लौंग को एक प्रभावी नेचुरल पेन किलर के रूप में मान्यता देता है। यह छोटा सा मसाला कई तरह के दर्द और स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी साबित होता है और आसानी से हर रसोई में उपलब्ध रहता है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों में लौंग को ‘औषधि रत्न’ कहा गया है। इसमें मौजूद यूजेनॉल (Eugenol) जैसे तत्व दर्द, सूजन और संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं। दांत दर्द की स्थिति में लौंग के तेल को रुई में भिगोकर प्रभावित दांत पर रखने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है और दांतों में पनपने वाले बैक्टीरिया भी खत्म होते हैं। माइग्रेन या सामान्य सिरदर्द में लौंग को पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से तनाव और दर्द कम होता है।
लौंग का उपयोग जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और आमवात में भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसके तेल से हल्की मालिश करने पर मांसपेशियों को आराम मिलता है और सूजन में कमी आती है। इसके अलावा, लौंग मुंह और गले से जुड़ी समस्याओं में भी कारगर है। लौंग चूसने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है और गले की खराश, सूजन व संक्रमण में राहत मिलती है।
पाचन से जुड़ी समस्याओं जैसे पेट दर्द, गैस, अपच और भूख न लगने की शिकायत में लौंग की चाय या लौंग का सेवन लाभ पहुंचाता है। यह पाचन अग्नि को मजबूत करती है और पाचन तंत्र को बेहतर ढंग से काम करने में सहायता करती है। सर्दियों के मौसम में खांसी, जुकाम, सांस की तकलीफ और हिचकी में भी लौंग का इस्तेमाल काफी प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह कफ और पित्त दोष को संतुलित करती है।
इसके साथ ही, लौंग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करती है। यह रक्त, मांसपेशियों, नसों और श्वसन तंत्र को मजबूती देती है तथा श्वेत रक्त कणों की संख्या बढ़ाने में सहायक होती है। हालांकि लौंग की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
अधिक मात्रा में सेवन करने से गर्मी, एसिडिटी या पित्त से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जिन लोगों को पहले से एसिडिटी या अत्यधिक गर्मी की समस्या हो, उन्हें लौंग का उपयोग सावधानी से करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
इस प्रकार, रसोई में मौजूद लौंग न केवल खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि कई तरह की बीमारियों से बचाव और राहत देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। (With inputs from IANS)


