एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (Antibiotic Resistance) आज दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है. ऐसे में बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages)—वो वायरस जो बैक्टीरिया को मारते हैं. एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं. हाल ही में 'न्यू इंग्लैंड बायोलैब्स' (NEB®) और 'येल यूनिवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीकी सफलता हासिल की है जो इस दिशा में गेमचेंजर साबित हो सकती है.

वैज्ञानिकों ने बनाया 'सिंथेटिक वायरस' जो खतरनाक बैक्टीरिया को करेगा खत्म

वैज्ञानिकों ने स्यूडोमोनास एरुगिनोसा (Pseudomonas aeruginosa) जैसे घातक और एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया से लड़ने के लिए दुनिया का पहला 'पूरी तरह से सिंथेटिक' बैक्टीरियोफेज इंजीनियरिंग सिस्टम विकसित किया है. यह तकनीक प्राकृतिक वायरस पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल डेटा और सिंथेटिक DNA का उपयोग करके लैब में वायरस तैयार करती है.

डेटा से तैयार होंगे वायरस (Phages from Sequence Data)

यह नई प्रणाली NEB के 'हाई-कॉम्प्लेक्सिटी गोल्डन गेट असेंबली' (HC-GGA) प्लेटफॉर्म पर आधारित है. शोधकर्ताओं ने छोटे सिंथेटिक DNA टुकड़ों का उपयोग करके कोशिका के बाहर ही पूरे बैक्टीरियोफेज जीनोम को असेंबल किया. इसमें आनुवंशिक बदलाव (Genetic modifications) करके वायरस के व्यवहार को बदला गया, जिससे वह विशिष्ट बैक्टीरिया को पहचान सके और उसे नष्ट कर सके.

संक्रमण को लाइव देखने के लिए इसमें 'फ्लोरोसेंट रिपोर्टर जीन' भी जोड़े गए.

NEB के शोधकर्ता एंडी सिक्केमा के अनुसार, "पहले बैक्टीरियोफेज इंजीनियरिंग में पूरा करियर निकल जाता था, लेकिन यह सिंथेटिक विधि सादगी, सुरक्षा और गति के मामले में एक लंबी छलांग है."

पुरानी बाधाओं का अंत

पारंपरिक तरीके से वायरस बनाने के लिए जीवित बैक्टीरिया और फिजिकल वायरस नमूनों की जरूरत होती थी, जो काफी जोखिम भरा और कठिन काम था. नई तकनीक की खूबियां.इंसानी रोगजनकों के साथ सीधे काम करने की जरूरत कम हो गई है. यह तकनीक DNA की गलतियों को कम करती है और जटिल जीनोम को आसानी से संभालती है. कई चरणों वाली एडिटिंग के बजाय, अब एक ही बार में सटीक बदलाव किए जा सकते हैं.

मॉलिक्यूलर टूल से इलाज तक

येल यूनिवर्सिटी और NEB के इस साझा प्रयास ने एक ऐसा 'हथियार' तैयार किया है जिसका इंतजार चिकित्सा जगत लंबे समय से कर रहा था. इस तकनीक का उपयोग भविष्य में पीने के पानी में बैक्टीरिया का पता लगाने वाले सेंसर बनाने और लाइलाज संक्रमणों के इलाज के लिए 'कस्टम-मेड' वायरस दवाएं तैयार करने में किया जा सकेगा. अभी प्री-क्लिनीकल परीक्षण बाकी हैं, लेकिन यह तकनीक भविष्य में एंटीबायोटिक दवाओं के विकल्प के रूप में एक मजबूत आधार तैयार करेगी.

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हाल ही में 'न्यू इंग्लैंड बायोलैब्स' और 'येल यूनिवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की है.
Priya Gupta
Priya Gupta

Priya Gupta brings over six years of dynamic journalism experience from leading Indian news agencies, including NDTV, News Nation, and Zee News. TV9 Bharatvarsh A seasoned reporter, she has covered key beats like politics, education, jobs, and international relations, delivering insightful analysis on national and global issues. Priya now drives coverage at health dailogues managing news updates in the health sector. She handles media outreach, develops press releases, spotlights healthcare professionals and institutions, and leads health awareness initiative