दिल्ली एम्स (AIIMS) की खास पहल, ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए जेंडर अफर्मिंग सर्जरी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने ट्रांसजेंडर समुदाय के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया. इस बैठक में एंडोक्राइनोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी और साइकैट्री विभाग के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. एम्स की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना है.
वर्ष 2021 से संचालित हो रहा है विशेष ट्रांसजेंडर क्लीनिक
प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत के अनुसार, एम्स में साल 2021 से एक समर्पित ट्रांसजेंडर क्लीनिक चलाया जा रहा है. यहां हर हफ्ते मरीजों की काउंसलिंग, शारीरिक जांच और हार्मोनल उपचार किया जाता है. डॉक्टरों का मानना है कि ट्रांसजेंडर होना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह केवल एक अलग पहचान और सोच का मामला है.
मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौतियां
बैठक में डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज और परिवार के सहयोग की कमी के कारण ट्रांसजेंडर व्यक्ति भारी मानसिक तनाव से गुजरते हैं. उन्हें अक्सर निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
- परिवार द्वारा सामाजिक बदनामी के डर से बहिष्कार.
- मानसिक उत्पीड़न और मारपीट.
- डिजिटल और यौन शोषण का शिकार होना.
- घर छोड़ने पर मजबूर होना.
डॉक्टरों ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि महाभारत के शिखंडी जैसे उदाहरण बताते हैं कि यह पहचान सदियों पुरानी है. 2019 के ट्रांसजेंडर अधिकार कानून के बाद अब अधिक लोग खुलकर इलाज के लिए सामने आ रहे हैं.
इलाज की प्रक्रिया, हार्मोन थेरेपी से सर्जरी तक
एम्स में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए इलाज की एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाती है. सबसे पहले साइकैट्री विभाग मरीज की मानसिक स्थिति की जांच करता है. इसके बाद एंडोक्राइनोलॉजी विभाग हार्मोनल बदलाव के लिए उपचार शुरू करता है. जेंडर अफर्मिंग सर्जरी, इसमें वेजिनोप्लास्टी और फैलोप्लास्टी जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल हैं. इसमें चेहरे की सर्जरी, वॉयस सर्जरी, ब्रेस्ट सर्जरी और एडम्स एप्पल शेव (Adam's Apple Shave) जैसी प्रक्रियाएं की जाती हैं.


