AIIMS दिल्ली का चमत्कार, महिला के पेट से निकाला 19.9 किलो का ट्यूमर, मिला नया जीवन

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है. संस्थान के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट्स ने पश्चिम बंगाल की एक 43 वर्षीय महिला के पेट से 19.9 किलोग्राम का विशाल ट्यूमर निकालकर उसे मौत के मुँह से बाहर निकाला है.
जब उम्मीदें खत्म हो गई थीं
दुर्गापुर की रहने वाली मुनमुन को जुलाई 2024 में एम्स लाया गया था। उन्हें स्टेज-4 कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) था. उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि ट्यूमर उनके पेट के कई अंगों में फैल चुका था. कई अस्पतालों में इलाज और कीमोथेरेपी के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ और डॉक्टरों ने उन्हें केवल 3-4 महीने का समय दिया था.
दो चरणों में हुई जटिल सर्जरी
प्रोफेसर डॉ. एम.डी. रे के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को दो चरणों में पूरा किया. पहला चरण (12 जनवरी): डॉक्टरों ने ट्यूमर का मुख्य हिस्सा निकाला। इस दौरान कोलन के कई हिस्से, गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब, लीवर के कुछ हिस्से और पेरिटोनियम को हटाया गया। सर्जरी इतनी जटिल थी कि मुख्य रक्त वाहिकाओं (IVC) पर भी खतरा था.
दूसरा चरण (15 जनवरी)-इसमें HIPEC (हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) प्रक्रिया अपनाई गई. इसमें गर्म कीमोथेरेपी दवाओं (41-43 डिग्री सेल्सियस) को सीधे पेट के अंदर डाला गया ताकि उन सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को मारा जा सके जो नग्न आंखों से दिखाई नहीं देतीं.
HIPEC तकनीक ने बदली किस्मत
डॉ. रे ने बताया कि आमतौर पर कीमोथेरेपी नसों के जरिए दी जाती है, लेकिन HIPEC तकनीक सीधे प्रभावित हिस्से पर काम करती है। डेढ़ घंटे तक चली इस प्रक्रिया के बाद मरीज का पेट पूरी तरह ट्यूमर मुक्त हो गया। हैरानी की बात यह है कि सर्जरी के अगले ही दिन मरीज मुस्कुरा रही थी और 20 जनवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.


