हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी में फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर पर आयोजित ‘चिंतन शिविर’ को लेकर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश अग्रवाल ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का हिस्सा है, जिसका मकसद सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर गहन विचार-विमर्श करना है, ताकि सेक्टर की चुनौतियों को समझकर उनके समाधान और भविष्य की दिशा तय की जा सके।

उन्होंने बताया कि यह मंच केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकार, उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए ठोस रणनीति तैयार की जाती है। खासतौर पर फार्मा सेक्टर के लिए यह अहम है, क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और तेजी से विकसित होता क्षेत्र है।

अमेरिका द्वारा फार्मास्युटिकल सेक्टर पर लगाए गए संभावित टैरिफ को लेकर अग्रवाल ने कहा कि शुरुआती समझ के मुताबिक भारतीय जेनेरिक दवाएं इन टैरिफ से बाहर हैं। ऐसे में भारत के फार्मा निर्यात पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, कुछ इनोवेटिव या पेटेंटेड दवाओं पर सीमित प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है। यदि किसी भी सेगमेंट में भारतीय उद्योग को दिक्कत आती है, तो उसे इस समझौते के तहत उठाया जाएगा और समाधान खोजा जाएगा।

अग्रवाल ने आगे कहा कि भारत का फार्मा सेक्टर मजबूत स्थिति में है, और केंद्र सरकार इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए लगातार नए बाजारों और उत्पादों पर ध्यान दे रही है। पिछले 5-6 वर्षों में भारत ने 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किए हैं, जो करीब 38 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं। इनका कुल आर्थिक आकार 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।

अग्रवाल के मुताबिक, ये समझौते भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेंगे, बाजारों में विविधता लाएंगे और घरेलू उद्योग को मजबूत करेंगे। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट अभी कुछ ही हफ्तों पुराना है, इसलिए इसके दीर्घकालिक प्रभाव का अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि, सरकार इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर रही है।

उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी बाहरी चुनौतियां समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन भारत ने हर बार इनसे निपटते हुए आगे बढ़ने की क्षमता दिखाई है।

अग्रवाल के अनुसार, करीब 60 अरब डॉलर के आकार वाला भारत का फार्मा उद्योग अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, आधुनिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। सरकार का लक्ष्य है कि बायोसिमिलर, बायोलॉजिक्स और इनोवेटिव दवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाए।

अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल दवाओं की कीमतों पर किसी बड़े असर के संकेत नहीं हैं। लेकिन अगर भविष्य में कोई समस्या आती है, तो सरकार और उद्योग मिलकर उसका समाधान निकालेंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि दवाओं की सप्लाई किसी भी हाल में बाधित न हो। सरकार और उद्योग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर दवाओं की उपलब्धता बनी रहे और भारत का फार्मा सेक्टर अपनी विकास की राह पर आगे बढ़ता रहे। (With inputs from IANS)

IANSTelanganaChintan ShivirRajesh Agrawal

Topic:

वैश्विक चुनौतियों के बीच सरकार फार्मा सेक्टर के निर्यात और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है।
Khushi Chittoria
Khushi Chittoria

Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.