हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित 51वें राष्ट्रीय चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका और उसकी आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे चिकित्सा क्षेत्र में नई आशा और संभावनाओं का द्वार बताया.

उचित उपचार उपलब्ध कराना संभव हो रहा है

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यक्तिगत बनाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि एआई तकनीकों की मदद से समय रहते मानसिक समस्याओं की पहचान कर उचित उपचार उपलब्ध कराना संभव हो रहा है. साथ ही, रोगों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक हुई है.

मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई फैक्टर हैं जिम्मेदार

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा पी सिंह ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। विषय था 'मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका।' इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में तनाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में एआई-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार और भाषा का विश्लेषण कर प्रारंभिक स्तर पर मानसिक समस्याओं की पहचान करने में सक्षम हो रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि 'टेली-मानस' जैसी सेवाएं दूरदराज के क्षेत्रों तक मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. साथ ही, देश में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक सहयोग का भी विषय है.

हर व्यक्ति को समय पर मदद दी जा सके

राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति को समय पर सहायता मिल सके। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि एआई आधारित वर्चुअल थेरेपिस्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म 24×7 सहायता प्रदान कर रहे हैं, जो विशेषकर उन क्षेत्रों में उपयोगी हैं जहां विशेषज्ञों की कमी है. उन्होंने यह भी बताया कि न्यूरोफीडबैक, ब्रेन इमेजिंग और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग मानसिक विकारों को बेहतर समझने और नए उपचार विकसित करने में सहायक हो रहा है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय संवाद का विकल्प नहीं हो सकती। इसलिए इन तकनीकों का उपयोग मानवीय मूल्यों के साथ संतुलित रूप से किया जाना आवश्यक है।

राज्यपाल ने डेटा गोपनीयता, नैतिकता और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि यदि एआई का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. इस अवसर पर कुलपति प्रो राणा पी सिंह ने सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे उच्च अकादमिक मानकों से युक्त आयोजन बताया। सम्मेलन संयोजक एवं मनोविज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद पी सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया.

कार्यक्रम में प्रोफेसर माधव गोविंद, प्रोफेसर गौरी शंकर कालोइया, प्रोफेसर आशा श्रीवास्तव, डॉ. निशी मिश्रा और डॉ. आलोक मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए। वहीं, इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स (आईएसीपी) के पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य डॉ. मनोरंजन सहाय ने सम्मेलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।

input IANS

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उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित 51वें राष्ट्रीय चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन का उद्घाटन किया.
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