कहीं आप भी तो नहीं हो रहे चिकुनगुनिया के शिकार? जानें इसके शुरुआती संकेत और बचाव

तमिलनाडु के कई हिस्सों में चिकुनगुनिया (Chikungunya) के बढ़ते मामले देखने को मिल रहे हैं.चिकुनगुनिया एक वायरल बीमारी है जो संक्रमित मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलती है. यह मुख्य रूप से एडिस एजिप्टी (Aedes aegypti) और एडिस एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) मच्छरों द्वारा फैलता है—यही वो मच्छर हैं जो डेंगू भी फैलाते हैं. हर किसी को चिकुनगुनिया (Chikungunya) के बचाव और लक्षण के बारे में जानना चाहिए.
चिकुनगुनिया के प्रमुख लक्षण
संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 7 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं. मरीज को बहुत तेज बुखार आता है जो अक्सर 102°F से ऊपर होता है. यह चिकुनगुनिया की सबसे बड़ी पहचान है. दर्द इतना गंभीर हो सकता है कि व्यक्ति सीधा खड़ा भी नहीं हो पाता। यह दर्द हफ्तों या महीनों तक बना रह सकता है.जोड़ों के आसपास सूजन और शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है. शरीर पर लाल रंग के दाने या चकत्ते निकल सकते हैं. सिरदर्द, थकान, सुस्ती और आंखों में जलन.
कारण और प्रसार
चिकुनगुनिया का वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता.जब एक मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है और फिर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तब यह वायरस फैलता है. ये मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय काटते हैं.
जांच और उपचार
चिकुनगुनिया की पहचान के लिए डॉक्टर आमतौर पर ELISA ब्लड टेस्ट या PCR टेस्ट की सलाह देते हैं. वर्तमान में चिकुनगुनिया के लिए कोई विशेष एंटी-वायरल दवा उपलब्ध नहीं है. इसका उपचार केवल लक्षणों को कम करने पर आधारित होता है.
शरीर को रिकवरी के लिए पर्याप्त आराम की जरूरत होती है.डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी, नारियल पानी और जूस पिएं. बुखार और दर्द को कम करने के लिए पैरासिटामोल जैसी दवाएं ली जाती हैं.ध्यान रखें,बिना डॉक्टर की सलाह के एस्पिरिन या अन्य पेनकिलर्स न लें.
बचाव के उपाय (Prevention)
इसकी कोई वैक्सीन व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए मच्छरों से बचाव ही सबसे अच्छा तरीका है. कूलरों, गमलों, टायरों और पुराने बर्तनों में पानी जमा न होने दें, क्योंकि यहां मच्छर अंडे देते हैं. सोते समय हमेशा मच्छरदानी का उपयोग करें.शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें (पूरी बाजू की शर्ट और पैंट).मच्छर भगाने वाली क्रीम या कॉइल्स का इस्तेमाल करें.
चिकुनगुनिया जानलेवा तो कम होता है, लेकिन इसका जोड़ों का दर्द लंबे समय तक व्यक्ति को कमजोर बना सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य है.


