दिल्ली में बढ़ते हार्ट अटैक मामलों को देखते हुए पुलिस कर्मियों के लिए विशेष हेल्थ कैंप, जिसमें जांच और जागरूकता पर जोर दिया गया.

दिल्ली में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को देखते हुए, दिल्ली पुलिस ने iLive Connect के साथ मिलकर शास्त्री पार्क के IT पार्क में एक खास “कार्डियक हेल्थ अवेयरनेस कैंप” आयोजित किया. इसका उद्देश्य पुलिस कर्मियों को दिल की बीमारियों के खतरे, बचाव और समय पर जांच के महत्व के बारे में जागरूक करना था. पुलिस कर्मियों की ड्यूटी काफी चुनौतीपूर्ण होती है. लगातार तनाव, लंबी ड्यूटी, नींद की कमी और अनियमित जीवनशैली उनके स्वास्थ्य, खासकर दिल पर बुरा असर डालती है. इसी को ध्यान में रखते हुए यह कैंप आयोजित किया गया.
दिल्ली में 34,539 लोगों की मौत हार्ट अटैक से हुई
हाल के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. साल 2024 में दिल्ली में 34,539 लोगों की मौत हार्ट अटैक से हुई, जबकि 2023 में यह संख्या 22,385 थी. यह बढ़ता आंकड़ा साफ संकेत देता है कि अब जागरूकता और रोकथाम पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. इस कार्यक्रम में जॉइंट सीपी मिलिंद महादेव, डीसीपी भारत रेड्डी और iLive Connect के संस्थापक डॉ. राहुल चंदोला मौजूद रहे. इस दौरान 30 से ज्यादा पुलिस कर्मियों की स्वास्थ्य जांच की गई.
जॉइंट सीपी मिलिंद महादेव ने कहा कि दिल की सेहत के लिए छोटी-छोटी आदतें बहुत जरूरी हैं.
उन्होंने बताया कि अगर हम अपने दिल का ध्यान रखें, तो दिल भी हमारा ख्याल रखेगा. उन्होंने सभी से व्यस्त दिनचर्या में भी खुद के लिए समय निकालने की अपील की. डीसीपी भारत रेड्डी ने भी इस पहल की सराहना की और बताया कि कोविड के बाद दिल से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि बेहतर लाइफस्टाइल अपनाकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. डॉ. राहुल चंदोला ने बताया कि दिल की बीमारी अक्सर बिना लक्षण के भी बढ़ती रहती है और कई बार अचानक हार्ट अटैक का कारण बनती है.
उन्होंने सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करने, रोज करीब 7.5 घंटे की नींद लेने और नमक व जंक फूड कम करने की सलाह दी.उन्होंने यह भी बताया कि कई बार सामान्य टेस्ट पूरी जानकारी नहीं दे पाते. ऐसे में लगातार निगरानी जरूरी होती है. इसी के लिए iLive Connect के डिवाइस पेश किए गए, जो 24 घंटे हार्ट की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. इन डिवाइस के जरिए डॉक्टर रियल टाइम में मरीज की स्थिति देख सकते हैं और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत अलर्ट दे सकते हैं.
कुछ पुलिस कर्मियों को यह डिवाइस 7 दिन के लिए दिए गए हैं, जिसके बाद उनकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. डॉ. चंदोला ने बताया कि यह सिर्फ एक शुरुआत है और आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. कुल मिलाकर, यह कैंप न सिर्फ जांच तक सीमित रहा, बल्कि लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करने और बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ.


