'हमारी यात्रा सेवा पर आधारित थी', पद्म श्री पुरस्कार विजेता डॉ. राजेंद्र प्रसाद और के.के. ठकराल

लखनऊ के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है, क्योंकि शहर के दो प्रतिष्ठित डॉक्टरों को चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित पद्म श्री (Padma Shri) पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. सम्मानित होने वाले चिकित्सकों में प्रसिद्ध पल्मोनोलॉजिस्ट और क्षय रोग (TB) विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जाने-माने आयुर्वेद सर्जन डॉ. के.के. ठकराल शामिल हैं.
डॉ. राजेंद्र प्रसाद: पल्मोनरी मेडिसिन के जनक
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को केजीएमयू में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग का संस्थापक माना जाता है. उन्होंने अपनी यात्रा एक छात्र के रूप में शुरू की थी और उसी विभाग के प्रमुख पद तक पहुंचे.
डॉ. प्रसाद ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी मीरा गुप्ता और पूरे परिवार को दिया. अपने पांच दशकों के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा मरीजों के साथ सम्मानजनक संबंध बनाए रखे हैं. मैं अगली पीढ़ी के डॉक्टरों को सलाह दूंगा कि वे मरीजों के साथ सहानुभूति से पेश आएं, क्योंकि अच्छा व्यवहार मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद करता है."
डॉ. के.के. ठकराल
आयुर्वेद की शल्य तंत्र (Ayurvedic Surgery) विधा के विशेषज्ञ डॉ. के.के. ठकराल को भी चिकित्सा में उनके योगदान के लिए पद्म श्री दिया गया है. मूल रूप से पाकिस्तान के सरगोधा जिले के रहने वाले डॉ. ठकराल का परिवार विभाजन के दौरान भारत आकर यमुनानगर में बस गया था. डॉ. ठकराल ने बताया कि उन्होंने 1964 में लखनऊ और 1968 में बनारस से अपनी शिक्षा पूरी की। वह एमएस (आयुर्वेद) के पहले बैच के टॉपर रहे हैं. उन्होंने अपना जीवन गरीब और श्रमिक वर्ग की सेवा में समर्पित कर दिया है.
आयुर्वेद और स्वास्थ्य सेवा पर विचार
डॉ. ठकराल ने आयुर्वेद को एक किफायती और प्रभावी चिकित्सा पद्धति बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आयुष (AYUSH) और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जनहित और राष्ट्रहित में है. उनके अनुसार, "आयुर्वेद एक ऐसी प्रणाली है जो विदेशी मुद्रा पर निर्भर नहीं है और आम आदमी के लिए सुलभ है."
Input IANS


