प्रेगनेंसी में कच्चा दूध पीना हो सकता है जानलेवा, न्यू मैक्सिको की दुखद घटना ने बढ़ाई चिंता, जानें पूरा मामला

अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक नवजात शिशु की मौत का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, शिशु की मौत एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण हुई, जिसका संभावित कारण मां द्वारा गर्भावस्था के दौरान कच्चे (unpasteurised) दूध का सेवन करना था. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह संक्रमण 'लिस्टेरिया' (Listeria) बैक्टीरिया की वजह से हुआ. यह एक ऐसा खतरनाक कीटाणु है जो शरीर में बिना किसी बड़े लक्षण के प्रवेश कर सकता है और गर्भपात, समय से पहले जन्म या नवजात शिशु में घातक संक्रमण का कारण बन सकता है.
कच्चा दूध बनाम पाश्चुरीकृत दूध: क्या है अंतर?
आजकल सोशल मीडिया पर "प्राकृतिक" भोजन के नाम पर कच्चे दूध का चलन बढ़ा है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे जोखिम भरा मानते हैं. कच्चा दूध (Raw Milk)-इसमें जानवरों की आंतों, मिट्टी या पानी से आए खतरनाक सूक्ष्मजीव जैसे ई. कोलाई, साल्मोनेला और लिस्टेरिया हो सकते हैं. पाश्चुरीकृत दूध (Pasteurised Milk)-पाश्चुरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें दूध को एक निश्चित तापमान पर गर्म करके हानिकारक बैक्टीरिया को मारा जाता है. यह तकनीक 100 साल से भी अधिक समय से उपयोग की जा रही है और यह दूध के पोषण को बदले बिना उसे सुरक्षित बनाती है.
गर्भवती महिलाओं के लिए 10 गुना अधिक खतरा
वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में अन्य स्वस्थ वयस्कों की तुलना में 'लिस्टेरियोसिस' होने की संभावना 10 गुना अधिक होती है. सबसे डरावनी बात यह है कि मां को केवल हल्के फ्लू जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं, लेकिन बैक्टीरिया प्लेसेंटा को पार करके बच्चे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा है?
- गर्भवती महिलाएं और उनके शिशु-संक्रमण से नवजात की मृत्यु का जोखिम.
- छोटे बच्चे-उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पूरी तरह विकसित नहीं होती.
- बुजुर्ग (65 वर्ष से अधिक)-कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण गंभीर बीमारी का खतरा.
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग-पुरानी बीमारियों से जूझ रहे व्यक्ति.
भ्रामक दावों की सच्चाई
अक्सर दावा किया जाता है कि कच्चा दूध अधिक पौष्टिक होता है, लेकिन अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों ने इसे खारिज किया है. पाश्चुरीकृत दूध में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन उतने ही होते हैं जितने कच्चे दूध में, बस इसमें बीमारी फैलाने वाले कीटाणु नहीं होते.
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सुझाव
- हमेशा पाश्चुरीकृत (Pasteurised) डेयरी उत्पाद ही खरीदें और लेबल जरूर जांचें.
- गर्भावस्था के दौरान कच्चे दूध और उससे बने उत्पादों (जैसे कुछ सॉफ्ट चीज़) से पूरी तरह परहेज करें.
- अगर कच्चा दूध पीने के बाद बीमार महसूस करें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.


