कर्नाटक के सभी जिलों में अगले साल तक स्थापित होंगे अर्ली इंटरवेंशन सेंटर: स्वास्थ्य मंत्री

बेंगलुरु: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि अगले वर्ष तक राज्य के सभी जिलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) स्थापित किए जाएंगे। यह कदम विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के कल्याण और उनकी प्रारंभिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने यह घोषणा विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रकाश कोलिवाड द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में की। उन्होंने बताया कि डीईआईसी केंद्रों का उद्देश्य बच्चों में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और विकासात्मक देरी की समय पर पहचान और उनका इलाज करना है। इन केंद्रों में बाल रोग विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स, कार्डियोलॉजिस्ट, नेत्र विशेषज्ञ और कुछ केंद्रों में मनोवैज्ञानिक भी तैनात किए जाएंगे, ताकि बच्चों को विशेष सहायता और विशेषज्ञ देखभाल उपलब्ध हो सके।
वर्तमान में राज्य में 17 डीईआईसी केंद्र संचालित हो रहे हैं और कोप्पल जिले में जल्द ही एक नया केंद्र शुरू होने वाला है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि भविष्य में प्रत्येक जिले में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे, क्योंकि शुरुआती पहचान और इलाज बच्चों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
विधायक प्रकाश कोलिवाड ने इस अवसर पर कहा कि राज्य में दिव्यांग बच्चों की संख्या और पंजीकृत मामलों के बीच काफी अंतर है। एक सर्वे के अनुसार राज्य में लगभग 6.3 प्रतिशत बच्चे दिव्यांग हैं, लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र में केवल 137 बच्चों का पंजीकरण हुआ है, जबकि अनुमानित संख्या 18,000 के करीब है। उन्होंने विशेष रूप से हावेरी जिले में डीईआईसी केंद्र की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया और सरकार से जल्द केंद्र स्थापित करने की मांग की।
कोलिवाड ने यह भी बताया कि आरबीएसके कार्यक्रम के तहत कई बच्चों की पहचान तो हो चुकी है, लेकिन उपचार के लिए उन्हें हुब्बल्ली, मंगलुरु और शिवमोग्गा जैसे शहरों तक जाना पड़ता है। उन्होंने यह सुझाव दिया कि तालुक स्तर पर टेली-थेरेपी और टेली-काउंसलिंग सेवाओं को शुरू किया जाए और दिव्यांग बच्चों को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम में लाया जाए, ताकि सरकार उनकी जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सके और उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध करवा सके।
इस पहल से राज्य में दिव्यांग बच्चों की स्वास्थ्य सेवा और कल्याण में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे उनकी शिक्षा, जीवन गुणवत्ता और भविष्य सुरक्षित हो सके। (With inputs from IANS)


