सर्वाइकल कैंसर से बचना है तो 20 की उम्र के बाद न भूलें यह टेस्ट, डॉक्टर ने बताई बड़ी वजह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है. साल 2022 में इसके लगभग 6,60,000 नए मामले सामने आए और 3,50,000 मौतें दर्ज की गईं. भारत में भी यह महिलाओं के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी और समय पर जांच से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है. फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अमोल अखाड़े ने इस बीमारी के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार यानी'पप स्मीयर' (Pap smear) टेस्ट के महत्व पर जोर दिया है.
जानें पप स्मीयर क्यों है जरूरी
सर्वाइकल कैंसर की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह शरीर में बहुत धीरे-धीरे और बिना किसी लक्षण के पनपता है. डॉ. अखाड़े बताते हैं कि यह कैंसर रातों-रात नहीं होता, बल्कि इसके विकसित होने में कई साल लगते हैं. यदि शुरुआती बदलावों को समय रहते पकड़ लिया जाए, तो कैंसर बनने से पहले ही इसे रोका जा सकता है.
पप स्मीयर टेस्ट क्या है और क्या इसमें दर्द होता है?
पप स्मीयर एक सरल और सुरक्षित क्लिनिकल टेस्ट है, जिसमें गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) से कोशिकाओं का नमूना लेकर असामान्य बदलावों की जांच की जाती है. यह कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है.इसमें एनेस्थीसिया या अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती. हल्का असहज महसूस हो सकता है, लेकिन यह दर्दनाक नहीं होता.
जांच की समय-सीमा (Screening Guidelines)
- डॉ. अखाड़े के अनुसार, स्वस्थ महसूस करने वाली महिलाओं को भी नियमित अंतराल पर यह टेस्ट कराना चाहिए.
- 21 से 29 साल- हर 3 साल में एक बार पप स्मीयर कराएं (यदि रिपोर्ट सामान्य है).
- 30 से 65 वर्ष- हर 3 साल में पप स्मीयर, या हर 5 साल में पप स्मीयर और HPV टेस्टिंग का कॉम्बिनेशन.
- जो महिलाएं अब सक्रिय रूप से यौन संबंध नहीं बना रही हैं या जिनके बच्चे हो चुके हैं, उन्हें भी स्क्रीनिंग बंद नहीं करनी चाहिए.
भ्रांतियों को दूर करना
अक्सर महिलाएं शर्म, दर्द के डर या जानकारी के अभाव में यह टेस्ट नहीं करातीं. कई महिलाओं का मानना है कि लक्षण होने पर ही टेस्ट कराना चाहिए, जो कि गलत है. असल में, स्क्रीनिंग में देरी करना ही जोखिम को बढ़ाता है.


