एचपीवी टीका पूरी तरह सुरक्षित, बच्चियों को जरूर लगवाएं : डॉ. रूबी नाज भट्टी

पुंछ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को अजमेर और राजस्थान से महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए राष्ट्रीय एचपीवी (Human Papillomavirus) टीकाकरण अभियान की शुरुआत करेंगे। इस अभियान के तहत 14-15 वर्ष की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए टीका मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा। पुंछ के राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल में डिप्टी सीएमओ डॉ. रूबी नाज भट्टी की देखरेख में अभियान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
डॉ. रूबी नाज भट्टी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय के लिए वह बेहद आभारी हैं, क्योंकि यह कदम देश की बेटियों को गंभीर बीमारी से बचाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि पहले यह वैक्सीन केवल निजी क्षेत्र में उपलब्ध थी, और इसके लिए कई परिवारों को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती थी।
उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी दोनों बेटियों को इस वैक्सीन के दो-दो डोज लगवाए हैं। अब यह टीका पूरे देश में 14-15 वर्ष की लड़कियों के लिए मुफ्त में उपलब्ध होगा।
डॉ. भट्टी ने आम जनता से अपील की कि अपनी बेटियों को इस टीके के माध्यम से सुरक्षित करना सुनिश्चित करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और संदेश फैलाए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। वे स्वयं भी दो बच्चियों की मां हैं और उन्होंने वैक्सीन अपने बच्चों को लगवाई है।
उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है, ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर सबसे अधिक महिलाओं की जान लेता है। इसलिए यह टीका न केवल सुरक्षित है, बल्कि बच्चियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और जीवन की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक भी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान के साथ पुंछ और पूरे देश में टीकाकरण अभियान प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
इसके माध्यम से सरकार का उद्देश्य युवाओं और परिवारों में जागरूकता फैलाना, समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना और महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करना है। डॉ. भट्टी ने अंतिम रूप से कहा कि किसी भी तरह की अफवाह से डरना या घबराना नहीं चाहिए, बल्कि विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सलाह पर भरोसा करना चाहिए और अपने बच्चों को इस जीवनरक्षक टीके के तहत सुरक्षित कराना चाहिए। (With inputs from IANS)


