हैदराबाद: अवैध सरोगेसी रैकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 29.76 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की गई है।

जांच एजेंसी के अनुसार इस कार्रवाई के तहत कुल 50 अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। इनमें जमीन के टुकड़े, फ्लैट और एक अस्पताल शामिल हैं। ये संपत्तियां डॉ. पचीपल्ली नम्रता उर्फ अथलुरी नम्रता और उनके बेटों के नाम पर पाई गई हैं। इन संपत्तियों की वर्तमान बाजार कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ईडी ने यह जांच हैदराबाद के गोपालपुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, अवैध सरोगेसी और बाल तस्करी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

जांच में सामने आया कि डॉ. नम्रता यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर के नाम से अपने क्लिनिक, कर्मचारियों और एजेंटों की मदद से एक संगठित सरोगेसी रैकेट चला रही थीं। इस रैकेट के जरिए निःसंतान दंपतियों को नवजात शिशु उपलब्ध कराए जाते थे और इसके बदले उनसे भारी रकम वसूली जाती थी।

ईडी के मुताबिक दंपतियों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि सरोगेट मां के जरिए उनके ही युग्मकों से बच्चा पैदा कराया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया कानूनी और वास्तविक लगे। लेकिन जांच में यह सामने आया कि कई मामलों में नवजात शिशु गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता से लिए जाते थे, जो आर्थिक तंगी के कारण बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे या गर्भपात कराने की सोच रहे थे।

जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि इस रैकेट में एजेंटों और सब-एजेंटों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय था। ये लोग गरीब और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को बहला-फुसलाकर उन्हें बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नवजात को छोड़ने के लिए तैयार करते थे।

ईडी के अनुसार डॉ. नम्रता एक बच्ची के लिए लगभग 3.5 लाख रुपये और एक बच्चे के लिए करीब 4.5 लाख रुपये तक वसूलती थीं। इन बच्चों का जन्म विशाखापत्तनम स्थित अस्पताल में कराया जाता था, क्योंकि सिकंदराबाद में स्थित उनके अस्पताल का लाइसेंस अधिकारियों द्वारा पहले ही रद्द कर दिया गया था। इसके अलावा नगर निगम को भेजी गई जन्म रिपोर्टों में असली जैविक माता-पिता की जगह निःसंतान दंपतियों के नाम दर्ज कराए जाते थे।

जांच में यह भी पता चला कि यह अवैध रैकेट वर्ष 2014 से संचालित हो रहा था। कई शिकायतें दर्ज होने और मेडिकल लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद डॉ. नम्रता इस गतिविधि को जारी रखे हुए थीं। कई दंपतियों से चेक और नकद के माध्यम से बड़ी रकम वसूली गई, जिसे बाद में एजेंटों, सब-एजेंटों और नवजात बच्चों के जैविक माता-पिता के बीच बांटा जाता था।

डॉ. नम्रता के बैंक खातों की जांच से इस पूरी कार्यप्रणाली की पुष्टि हुई है। इसमें यह सामने आया कि निःसंतान दंपतियों से प्राप्त धनराशि का उपयोग एजेंटों को भुगतान करने और वहां से नवजात बच्चों के जैविक माता-पिता तक पैसे पहुंचाने में किया जाता था।

पीएमएलए जांच के दौरान डॉ. नम्रता और उनके बेटों के नाम पर कई संपत्तियां सामने आईं, जिनमें से कई संपत्तियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।

इससे पहले ईडी ने 12 फरवरी 2026 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत डॉ. नम्रता को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और मामले में आगे की जांच जारी है। (With inputs from IANS)

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Hyderabad Illegal Surrogacy Racket: ED Seizes Assets Worth ₹29.76 Crore
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Khushi Chittoria

Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.