इंदौर: मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शुक्रवार को बताया कि राज्य सरकार इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर के साथ एक विशेष क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जिसका लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना और मेडिकल पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।

इंदौर में प्रस्तावित स्वास्थ्य और वेलनेस पर्यटन कॉरिडोर पर एक हितधारक परामर्श कार्यशाला में बोलते हुए डिप्‍टी सीएम शुक्ला ने कहा कि यह पहल पीएम मोदी के नेतृत्व में देश भर में विशेष मेडिकल हब विकसित करने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का हिस्सा है।

शुक्ला ने कहा, "मध्य प्रदेश में एक क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित करने का काम पहले ही शुरू हो चुका है। इससे स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी, मेडिकल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।"

उन्होंने कहा कि इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर इस परियोजना के लिए आदर्श है। एक तरफ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है और दूसरी तरफ उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर है। बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए इन दोनों स्थानों पर आते हैं, इसलिए यह क्षेत्र स्वाभाविक रूप से उपयुक्त है। इंदौर एक प्रमुख शैक्षिक केंद्र भी है।

डिप्‍टी सीएम ने कहा कि प्रस्तावित हब आधुनिक तकनीक का उपयोग करके विश्व स्तरीय, किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, साथ ही वेलनेस और आयुष-आधारित उपचारों को बढ़ावा देगा।

उन्होंने आगे कहा कि इसका उद्देश्य देश और विदेश से आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करना और वैश्विक स्तर पर भारत की चिकित्सा क्षमताओं को प्रदर्शित करना है। भारत मेडिकल पर्यटन सूचकांक और वेलनेस सूचकांक में पहले से ही एक मजबूत स्थिति रखता है, और यह नया हब इस स्थिति को और मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य में मरीजों की देखभाल, पुनर्वास सेवाओं और आयुष सुविधाओं में भी सुधार करेगी। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। मध्य प्रदेश को भी इसका लाभ मिल रहा है, जहां टियर-2 और टियर-3 शहरों में वेलनेस केंद्र खुल रहे हैं।

उन्होंने लाखों लोगों को मुफ्त उपचार प्रदान करने में आयुष्मान भारत योजना की सफलता की ओर भी इशारा किया।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य के भीतर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुधार होने से मरीजों को मेट्रो शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता कम हो गई है। पहले लोगों को अंग प्रत्यारोपण के लिए मुंबई जैसे शहरों में जाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसी सुविधाएं इंदौर में ही उपलब्ध हैं।

डिप्‍टी सीएम ने जन स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि दूषित पेयजल बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया, जिसमें जैविक इनपुट का उपयोग भी शामिल है। (With inputs from IANS)

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इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर पर मेडिकल हब बनाया जाएगा।
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