पोलियो उन्मूलन की ओर बड़ी सफलता, WHO ने भारत की 'Biological E' द्वारा निर्मित नई nOPV2 वैक्सीन को दी मंजूरी

दुनिया को पोलियो मुक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने टाइप-2 ओरल पोलियो वैक्सीन (nOPV2) को 'प्रीक्वालिफिकेशन' (Prequalification) का दर्जा दे दिया है. भारत की कंपनी Biological E. Limited (BioE) द्वारा निर्मित यह वैक्सीन अब दुनिया भर में पोलियो के प्रकोप को रोकने और इसके उन्मूलन अभियान में तेजी लाने के लिए उपलब्ध होगी.
क्या है 'प्रीक्वालिफिकेशन' का मतलब?
WHO का यह प्रमाणन दर्शाता है कि वैक्सीन अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के मानकों पर खरी उतरती है. इसके बाद अब UNICEF जैसी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां इस वैक्सीन को खरीद सकेंगी और उन देशों को आपूर्ति कर सकेंगी जहाँ पोलियो का खतरा बना हुआ है.
nOPV2 वैक्सीन क्यों है खास?
यह नई वैक्सीन (nOPV2) विशेष रूप से टाइप-2 सर्कुलेटिंग वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस (cVDPV2) के प्रकोप से निपटने के लिए विकसित की गई है. पारंपरिक ओरल वैक्सीन की तुलना में, nOPV2 अनुवांशिक रूप से अधिक स्थिर है. इसका मतलब है कि इससे नए प्रकोप फैलने का खतरा बहुत कम हो जाता है. भारत की Biological E. Limited द्वारा इसके उत्पादन से वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की कमी दूर होगी और एक भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला तैयार होगी.
पोलियो के खिलाफ जंग में बड़ी जीत
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने 158वें कार्यकारी बोर्ड सत्र में बताया कि टीकाकरण के प्रयासों से पोलियो के मामलों में भारी कमी आई है. वर्ष 2024 में जहां 49 जिलों से 99 मामले सामने आए थे, वहीं पिछले वर्ष (2025) यह घटकर केवल 24 जिलों में 41 मामलों तक सिमट गया है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान अब एकमात्र ऐसे देश बचे हैं जहाँ वाइल्ड पोलियो अभी भी मौजूद है.
वैक्सीन की विशेषताएं और उपयोग
इस वैक्सीन को -20°C पर 24 महीने तक और +2°C से +8°C पर 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है. WHO की 'मल्टी-डोज वायल पॉलिसी' के तहत, खोली गई शीशियों का उपयोग 28 दिनों तक किया जा सकता है, जिससे कैंपेन के दौरान वैक्सीन की बर्बादी कम होती है. यह वैक्सीन सभी आयु वर्गों के लिए सुरक्षित है और अब तक करोड़ों बच्चों को दी जा चुकी है.


