ब्लैक फंगस के खिलाफ शरीर का नया सुरक्षा कवच, एल्ब्यूमिन प्रोटीन की बड़ी खोज

हाल ही में 'नेचर' (Nature) जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने मानव के खून में पाए जाने वाले सबसे प्रचुर प्रोटीन, एल्ब्यूमिन (Albumin), की एक नई और जीवन रक्षक भूमिका का खुलासा किया है. ग्रीस, यूरोप, अमेरिका और भारत के वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने पाया है कि एल्ब्यूमिन हमें 'म्यूकोरमाइकोसिस' (जिसे 'ब्लैक फंगस' भी कहा जाता है) जैसे घातक संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
क्या है म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस)?
म्यूकोरमाइकोसिस एक दुर्लभ लेकिन बहुत ही खतरनाक फंगल इन्फेक्शन है, जिसकी मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक हो सकती है. यह संक्रमण तब होता है जब फंगस के बीजाणु (spores) सांस के जरिए शरीर में जाते हैं या घाव के जरिए से एंट्री करते हैं. यह फंगस एक शक्तिशाली टॉक्सिन छोड़ता है जो ऊतकों (tissues) को नष्ट कर देता है, जिससे त्वचा काली पड़ने लगती है. 2021 में भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान इसके हजारों मामले सामने आए थे.
एल्ब्यूमिन कैसे करता है बचाव?
इस स्टडी में पाया गया कि जिन मरीजों में एल्ब्यूमिन का लेवल कम होता है (Hypoalbuminemia), उनमें ब्लैक फंगस का खतरा और मृत्यु की संभावना सबसे अधिक होती है. एल्ब्यूमिन रक्त में म्यूकोरल्स फंगस की वृद्धि को चुनिंदा रूप से रोकता है. हेल्दी लोगों के खून से एल्ब्यूमिन हटाने पर यह फंगस अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगा.
एल्ब्यूमिन के साथ जुड़े 'फ्री फैटी एसिड' इस सुरक्षा तंत्र का मुख्य हिस्सा हैं. एल्ब्यूमिन इन एसिड्स को ऑक्सीकरण (oxidation) से बचाता है. जब ये फंगस के अंदर आते हैं, तो वे उन जीन को सक्रिय होने से रोक देते हैं जो फंगस के विकास के लिए जरूरी हैं. एल्ब्यूमिन से बंधे फैटी एसिड फंगस के भीतर प्रोटीन बनने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं, जिससे वह बीमारी फैलाने में असमर्थ हो जाता है.
कोविड-19 के दौरान शरीर में सूजन (inflammation) के कारण एल्ब्यूमिन का उत्पादन कम हो गया था, जो संभवतः भारत में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण था. यह रिसर्च बताता है कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, कुपोषण और मधुमेह के रोगियों में एल्ब्यूमिन की कमी उन्हें इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है.
यह खोज म्यूकोरमाइकोसिस के इलाज में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है. अब वैज्ञानिक एल्ब्यूमिन का उपयोग इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिए एक चिकित्सीय विकल्प (therapeutic option) के रूप में करने की संभावना तलाश रहे हैं.


