दिल की बीमारियों की पहचान में बड़ी क्रांति, AI स्टेथोस्कोप ने डॉक्टरों के पारंपरिक तरीके को पीछे छोड़ा

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है. हाल ही में 'यूरोपियन हार्ट जर्नल – डिजिटल हेल्थ' में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, AI-सक्षम डिजिटल स्टेथोस्कोप दिल के वॉल्व की बीमारियों (Valvular Heart Disease - VHD) को पकड़ने में पारंपरिक स्टेथोस्कोप की तुलना में दोगुना अधिक प्रभावी पाया गया है.
अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े: 46% बनाम 92%
अमेरिका में 50 वर्ष से अधिक आयु के 357 मरीजों पर किए गए इस परीक्षण में पारंपरिक और AI स्टेथोस्कोप के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से देखा गया. पारंपरिक स्टेथोस्कोप (Traditional Stethoscope)- इसकी संवेदनशीलता (Sensitivity) मात्र 46.2% रही. इसका मतलब है कि सामान्य जांच के दौरान आधे से अधिक गंभीर मरीज बिना पहचान के रह जाते हैं.
AI-सक्षम स्टेथोस्कोप (AI-Enabled Stethoscope)- इसने 92.3% सटीकता के साथ बीमारियों की पहचान की. यह अंतर करोड़ों लोगों के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है, क्योंकि 65 वर्ष से अधिक उम्र के 50% से अधिक लोग वॉल्व की बीमारी से प्रभावित होते हैं.
कैसे काम करता है यह "स्मार्ट" स्टेथोस्कोप?
यह डिवाइस दिल की धड़कनों की "हाई-फिडेलिटी" (बेहद स्पष्ट) आवाज़ें रिकॉर्ड करता है. इसके बाद मशीन-लर्निंग एल्गोरिदम उन ध्वनियों का विश्लेषण करते हैं. इंसानी कान के विपरीत, यह एल्गोरिदम बैकग्राउंड शोर या सुनने की क्षमता में कमी जैसी बाधाओं से प्रभावित नहीं होता. यह उन बारीक आवाजों को भी पकड़ लेता है जिन्हें अनुभवी डॉक्टर भी अक्सर नहीं सुन पाते. यह उपकरण स्वयं निदान (Diagnosis) नहीं करता, बल्कि डॉक्टर को संकेत देता है कि मरीज को इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) की जरूरत है.
मरीजों और डॉक्टरों के लिए इसके मायने
वॉल्व की बीमारी के लक्षण अक्सर बहुत सामान्य होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आसान होता है। AI स्टेथोस्कोप के उपयोग से बीमारी की शुरुआती पहचान संभव होगी. हार्ट फेल्योर के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मामलों में भारी कमी आएगी. इलाज के खर्च को कम करने में मदद मिलेगी. यह तकनीक डॉक्टरों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी निर्णय क्षमता को और अधिक सटीक बनाने के लिए है.


