गौतम बुद्ध नगर में खसरा-रुबेला टीकाकरण अभियान शुरू, 27 फरवरी तक स्कूलों में दी जाएगी मुफ्त वैक्सीन

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए 16 फरवरी से एक विशेष खसरा-रुबेला (MR) टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान 27 फरवरी तक चलेगा, जिसका मुख्य लक्ष्य जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को कवर करना है.
स्कूलों में ही होगा टीकाकरण: पहुंच और सुविधा पर जोर
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि टीकाकरण सत्र स्कूलों के भीतर ही आयोजित किए जा रहे हैं. इससे न केवल छात्रों और अभिभावकों को आसानी होगी, बल्कि अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी। यह पहल राज्य सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारियों खसरा और रुबेला, के खिलाफ बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करना है.
क्यों जरूरी है MR वैक्सीन? समझें जोखिम
सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों के अनुसार, खसरा और रुबेला बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं.
खसरा (Measles)-इसके कारण निमोनिया, दस्त (Diarrhea), कान में संक्रमण, मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) और गंभीर मामलों में मृत्यु तक हो सकती है.
रुबेला (Rubella)-यह बच्चों में गठिया (Arthritis) जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है. अगर कोई गर्भवती महिला इसकी चपेट में आती है, तो नवजात शिशु में 'जन्मजात रुबेला सिंड्रोम' (Congenital Rubella Syndrome) का खतरा बढ़ जाता है.
CMO की अपील: "सुरक्षित और मुफ्त है यह टीका"
गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा, "इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के बीच इम्युनिटी गैप को खत्म करना है. अभियान के दौरान बच्चों को एमआर वैक्सीन की एक अतिरिक्त खुराक दी जाएगी. यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है."
जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्कूलों को टीकाकरण की तारीखों के बारे में पहले ही सूचित कर दिया है. शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन के साथ समन्वय स्थापित किया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके.
अभिभावकों की भूमिका है महत्वपूर्ण
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि पर अपने बच्चों की स्कूल में उपस्थिति सुनिश्चित करें. स्कूल परिसर में टीकाकरण होने से बच्चों के छूटने की संभावना कम हो जाती है. स्वास्थ्य टीमें पूरे जिले में तैनात की गई हैं जो प्रोटोकॉल के पालन की निगरानी कर रही हैं.


