MRI गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड ब्रेस्ट बायोप्सी से स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में क्रांति

अपोलो एथेना महिला कैंसर केंद्र स्तन कैंसर की जल्दी और अधिक सटीक पहचान की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है. यहां अब MRI गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड ब्रेस्ट बायोप्सी (MRI-Guided VABB) की सुविधा उपलब्ध है. यह एक आधुनिक, कम चीरा लगाने वाली (मिनिमली इनवेसिव) जांच तकनीक है, जिससे डॉक्टर स्तन कैंसर को बहुत शुरुआती अवस्था—स्टेज 0 या स्टेज 1 में ही पहचान और पुष्टि कर सकते हैं, जब बीमारी अभी छोटी होती है, कोई लक्षण नहीं होते और इलाज सबसे प्रभावी होता है.
बिना दर्द और बिना किसी लक्षण के चुपचाप बढ़ते रहते हैं
अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग हर तीन में से एक महिला में मैमोग्राफी के दौरान कैंसर छूट सकता है. जिन महिलाओं के स्तन घने (डेंस ब्रेस्ट) होते हैं, उनमें यह खतरा और भी अधिक होता है,ऐसे मामलों में 50 प्रतिशत तक कैंसर पहचान में नहीं आ पाते. ये कैंसर बिना गांठ, बिना दर्द और बिना किसी लक्षण के चुपचाप बढ़ते रहते हैं, और सामान्य जांचों से पकड़ में नहीं आते.
भारत में समस्या और भी गंभीर है
यह समस्या भारत में और भी गंभीर है, क्योंकि यहां कम उम्र की महिलाओं में स्तन कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, और अक्सर पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग 10 साल पहले इसका पता चलता है. दुर्भाग्य से, कई मामलों में बीमारी तब सामने आती है जब वह काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज लंबा, कठिन और परिणामों पर असर डालने वाला हो जाता है.
डॉ. प्रीथा रेड्डी, एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने कहा, “एशिया के पहले समर्पित महिला कैंसर केंद्र, अपोलो एथेना में भारत की पहली एडवांस्ड MRI गाइडेड वैक्यूम-असिस्टेड ब्रेस्ट बायोप्सी की शुरुआत महिलाओं के कैंसर इलाज में एक ऐतिहासिक बदलाव है. इससे पूरे ब्रेस्ट डायग्नोस्टिक सिस्टम को अधिक सटीकता, तेज़ी और भरोसे के साथ मजबूत किया गया है. हमारा उद्देश्य है हर महिला को समय पर, कम तकलीफ वाला इलाज और बेहतर जीवन की संभावना देना.”
अपोलो एथेना में आधुनिक MRI मशीनों और AI आधारित तकनीकों की मदद से ब्रेस्ट MRI स्कैन का समय लगभग 50 मिनट से घटाकर 15 मिनट से भी कम कर दिया गया है, वह भी बिना जांच की गुणवत्ता से समझौता किए। इससे अब डेंस ब्रेस्ट या उच्च जोखिम वाली महिलाएं आसानी से ब्रेस्ट MRI करा सकती हैं, जो स्तन कैंसर की पहचान का सबसे संवेदनशील तरीका है.
बड़े अध्ययन में पता चली ये बात
भारत में किए गए एक बड़े अध्ययन (2,470 स्तन कैंसर मरीजों पर आधारित) में पाया गया कि 14.3% मरीज 40 वर्ष से कम उम्र की थीं. चिंता की बात यह है कि इनमें से लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं स्टेज III या IV में अस्पताल पहुँचीं, और 45.7 प्रतिशत में ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर पाया गया, जो एक आक्रामक प्रकार है.
डॉ. ज्योति अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट और लीड, ब्रेस्ट रेडियोलॉजी विभाग, अपोलो एथेना महिला कैंसर केंद्र ने कहा, “जल्दी पहचान ही जान बचाती है. युवा महिलाओं में स्तन अक्सर घने होते हैं, जिससे सामान्य जांचों में कैंसर पकड़ में नहीं आता. ऐसे कैंसर स्वभाव से भी अधिक आक्रामक हो सकते हैं. लेकिन सबसे बड़ा नुकसान देर से पहचान के कारण होता है। MRI गाइडेड VABB की मदद से हम कैंसर को—कई बार स्टेज 0 में ही—पहचान सकते हैं, इससे पहले कि वह जीवन को पूरी तरह बदल दे.”
भारत में स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है, जो कुल महिला कैंसर मामलों का लगभग 27–28% है. अनुमान है कि 2050 तक भारत में स्तन कैंसर के नए मामलों में 170% से अधिक और मृत्यु दर में 200% से अधिक की वृद्धि हो सकती है. यह स्थिति विशेष रूप से कम उम्र की महिलाओं में बढ़ते मामलों को देखते हुए और भी गंभीर हो जाती है. हालांकि मैमोग्राफी अब भी एक महत्वपूर्ण जांच है, लेकिन डेंस ब्रेस्ट वाली महिलाओं में इसकी प्रभावशीलता काफी कम हो जाती है.
इस तकनीक का असर अब सामने आने लगा है. हाल ही में 70 वर्षीय महिला खून के साथ निप्पल से स्राव की शिकायत लेकर आईं.जो स्तन कैंसर का एक चेतावनी संकेत हो सकता है. लेकिन उनकी मैमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड पूरी तरह सामान्य थे. आमतौर पर ऐसे मामलों में मरीज को 6 महीने बाद दोबारा आने को कहा जाता है.
अपोलो एथेना में उन्हें MRI गाइडेड VABB कराया गया, जिसमें स्टेज 0 (DCIS) स्तन कैंसर की पुष्टि हुई.ऐसा कैंसर जो सामान्य जांचों में दिखाई ही नहीं देता. समय पर सर्जरी हुई और उनकी स्थिति बेहद अच्छी रही. डॉ. अरोड़ा ने कहा, “यही असली शुरुआती पहचान है. MRI गाइडेड VABB के बिना यह कैंसर चुपचाप बढ़ता रहता. इस तकनीक ने हमें समय रहते हस्तक्षेप करने का मौका दिया और मरीज का जीवन बदलने से पहले बीमारी को रोक लिया.”


