राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य में एक ऐतिहासिक कदम: पूर्व आईसीएमआर महानिदेशक

जयपुर: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महानिदेशक वीएम कटोच और पूर्व स्वास्थ्य अनुसंधान सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को देशव्यापी मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण को भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम करार दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में एचपीवी वैक्सीन को शामिल करना सर्वाइकल कैंसर से बचाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी।
कटोच ने बताया कि एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है और यह बीमारी खासकर कम उम्र और मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं को प्रभावित करती रही है। उन्होंने स्पष्ट किया, “सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है, और टीकाकरण इसके लिए सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।” उन्होंने आगे कहा कि एचपीवी वैक्सीन विश्व स्तर पर संक्रमण को रोकने और सर्वाइकल कैंसर के मामलों को घटाने में प्रभावी साबित हुई है।
विश्व के 160 से अधिक देशों ने इस वैक्सीन को अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया हुआ है, जो इसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्व को दर्शाता है। भारत में इस वैक्सीन को लगभग दो दशक पहले मंजूरी मिली थी, लेकिन यह अब तक मुख्य रूप से निजी अस्पतालों तक ही सीमित रही, जहां केवल वही लोग इसे ले सकते थे जो इसका खर्च वहन कर सकते थे। इस वजह से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की कई लड़कियां इससे वंचित रह गईं।
कटोच ने कहा कि अब इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने से यह वैक्सीन उन महिलाओं तक भी पहुंचेगी जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है और जो निजी खर्च वहन नहीं कर सकतीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़े पैमाने पर टीकाकरण से न केवल लड़कियों को संक्रमण से पहले सुरक्षा मिलेगी, बल्कि समाज में वायरस के प्रसार को भी रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से भविष्य में भारत में सर्वाइकल कैंसर को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त किया जा सकेगा। यह पहल देश में रोकथाम योग्य बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। (With inputs from IANS)


