महाराष्ट्र में गैरकानूनी एग डोनेशन रैकेट पर एनसीडब्ल्यू का संज्ञान, कई महिलाओं के शोषण का खुलासा

मुंबई: महाराष्ट्र के बदलापुर में एक बड़े गैरकानूनी इंसानी अंडे (एग) निकालने और बेचने के रैकेट का राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य सरकार और पुलिस से मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
21 फरवरी को मीडिया रिपोर्ट आने के बाद आयोग की चेयरपर्सन ने महाराष्ट्र के डीजीपी को पूरे नेटवर्क की पहचान कर समयबद्ध जांच पूरी करने का निर्देश दिया। प्रभावित महिलाओं को तुरंत मेडिकल और मानसिक सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। डीजीपी से पांच दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने को कहा गया है।
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने भी पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर मामले की गंभीरता पर चर्चा की।
रैकेट का खुलासा तब हुआ जब एक महिला ने शिकायत की कि उससे एग डोनेशन कराई गई लेकिन तय राशि नहीं दी गई। जांच में पता चला कि कई आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को इस अवैध नेटवर्क में फंसाया गया था। पुलिस के अनुसार, कम से कम 40 महिलाओं का शोषण हुआ, जिसमें एक महिला से 33 बार अंडे निकाले गए। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बार अंडा निकालना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा ऑपरेशन असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 का उल्लंघन करते हुए चलाया गया। इस कानून के तहत एक महिला को जीवन में केवल एक बार एग डोनेशन की अनुमति है और इसके लिए कोई व्यावसायिक लाभ नहीं लिया जा सकता।
पुलिस के अनुसार, रैकेट में शामिल लोग आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को 25,000–30,000 रुपये देने का लालच देते थे। फिर उन्हें प्राइवेट घरों में हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते और अलग-अलग IVF सेंटर भेजा जाता था।
अब तक कम से कम चार महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें नेटवर्क की संदिग्ध सरगना सुलक्षणा गाडेकर भी शामिल हैं। पुलिस अन्य आरोपियों और जुड़े क्लीनिकों की पहचान कर रही है। (With inputs from IANS)


